राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और SIR प्रक्रिया के खिलाफ चल रहे देशव्यापी विरोध के बीच, कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया। इस कॉन्फ्रेंस का आयोजन विपक्षी 'INDIA' ब्लॉक के प्रमुख नेताओं की 'चाय पर चर्चा' के बाद किया गया था, जहां उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि वे आगामी कदमों का खुलासा नहीं करेंगे।
उन्होंने कहा कि यदि वे रणनीति साझा करेंगे, तो इससे आंदोलन का 'रोमांच और सरप्राइज फैक्टर' समाप्त हो जाएगा। राहुल गांधी ने स्पष्ट करते हुए कहा कि चाहे इसमें तीन महीने, छह महीने, या एक साल लगे, 'वोट चोरी' के खिलाफ यह संयुक्त संघर्ष अपने अंजाम तक पहुंचने से नहीं रुकेगा।
आंदोलन की निरंतरता पर जोर
प्रेस वार्ता में जब पत्रकारों ने भविष्य की कार्रवाइयों के बारे में प्रश्न किए, तो राहुल गांधी ने मुस्कुराते हुए कहा, "जल्दबाजी मत कीजिए, सरप्राइज का मजा खराब हो जाएगा।" उन्होंने कहा कि यह विरोध प्रदर्शन अपने अंतिम लक्ष्य तक पहुंचने के लिए जारी रहेगा।
राहुल ने 'INDIA' गठबंधन की एकजुटता और ऊर्जा का उल्लेख करते हुए कहा कि वे उसी ताकत के साथ सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ अपनी लड़ाई को आगे बढ़ाएंगे, जैसा कि उन्होंने संसद से सुप्रीम कोर्ट तक के मार्च में किया था।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका का दाखिला
राहुल गांधी ने एक दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के खिलाफ औपचारिक याचिका दाखिल की थी, जिसमें उनके साथ 10 अन्य प्रमुख विपक्षी नेताओं के हस्ताक्षर भी शामिल हैं।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और देश की न्यायप्रणाली पर भरोसा जताते हुए कहा, "हम सुप्रीम कोर्ट, मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और भारत की न्यायिक व्यवस्था का सम्मान करते हैं। हमें विश्वास है कि वे अपनी भूमिका निभाएंगे।" राहुल ने यह भी कहा कि राजनीतिक संघर्ष जारी रहेगा, चाहे संस्थाएं अपनी भूमिकाएं निभाएं या नहीं, अंततः जनता की जीत होगी।
याचिका में अन्य आयुक्तों का नाम
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई याचिका में चुनाव आयोग के दो अन्य आयुक्तों - सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी - को भी प्रतिवादी बनाया गया है। पिछले महीने इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि इन चुनाव आयुक्तों ने कई बार अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
चुनाव आयोग ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा था कि किसी बहु-सदस्यीय संस्था में विचारों का मतभेद होना सामान्य है और सभी निर्णय तीनों आयुक्तों की सहमति से ही लिए गए हैं। 2025 में मुख्य चुनाव आयुक्त बनने के बाद से ज्ञानेश कुमार पर आरोपों की बौछार हो रही है कि वे सत्ताधारी बीजेपी को लाभ पहुंचा रहे हैं।





