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राहुल गांधी पर महिला पत्रकार को धक्का देने का आरोप, CJI सूर्यकांत ने जांच का दिया आश्वासन

भाजपा ने घटना को लेकर गंभीर आरोप लगाए, CJI ने जांच का आश्वासन दिया।

राहुल गांधी पर महिला पत्रकार को धक्का देने का आरोप, CJI सूर्यकांत ने जांच का दिया आश्वासन
फोटो: Rahul Gandhi Accused of Pushing Pregnant Journalist, CJI Surya Kant Promises Investigation

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मार्च के दौरान राहुल गांधी द्वारा एक महिला पत्रकार को धक्का देने के मामले में सुनवाई की गई। भाजपा प्रवक्ता और वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट परिसर में एक प्रेग्नेंट महिला पत्रकार को धक्का दिया, जिसके कारण उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इस पर CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि अदालत इस मामले की जांच करेगी और नोटिस भी जारी किया गया है।


बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, सीनियर एडवोकेट गौरव भाटिया ने एएनआई की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि महिला पत्रकार को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि पत्रकारों को सुरक्षा मिलनी चाहिए, चाहे वे किसी के बारे में रिपोर्ट कर रहे हों। भाटिया ने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान महिला पुलिस अधिकारियों के साथ भी बदसलूकी की गई थी।


सीजेआई सूर्यकांत की टिप्पणी

सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि कोर्टरूम में राजनीतिक मुद्दों को लाया जा रहा है। इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि अदालत याचिका में की गई प्रार्थनाओं की जांच करेगी और नोटिस जारी किया गया। दरअसल, 12 अक्टूबर को राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन ने दिल्ली में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बड़ा मार्च आयोजित किया था, जिसमें सुप्रीम कोर्ट तक नेता गए थे।


इस दौरान, राहुल गांधी और अन्य कांग्रेस नेता सुप्रीम कोर्ट परिसर में पहुंचे, जहां भारी भीड़ इकट्ठा हो गई। एक वीडियो में देखा गया कि जब राहुल गांधी के चारों ओर भीड़ थी, तब एक व्यक्ति उनके करीब आ रहा था, जिसे उन्होंने हाथ से आगे बढ़ाया, जिसके परिणामस्वरूप वह महिला पत्रकार पर गिर गया। इसके बाद महिला पत्रकार को अस्पताल में भर्ती कराया गया।


भाजपा का आरोप

भाजपा ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी ने जानबूझकर प्रेग्नेंट महिला पत्रकार को धक्का दिया। इस मामले में CJI सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका को कोई भी डरा-धमका नहीं सकता और अदालत को बाहर की स्थिति का भलीभांति ज्ञान है। जस्टिस सूर्यकांत ने यह टिप्पणी कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं द्वारा 12 अक्टूबर को उच्चतम न्यायालय तक किए गए मार्च के संदर्भ में की।


सीजेआई और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने मार्च के खिलाफ दायर याचिका पर राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और अन्य को नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने कहा कि 12 अक्टूबर को उच्चतम न्यायालय परिसर में जो कुछ हुआ, वह अस्वीकार्य है।


अवमानना की कार्यवाही की मांग

भाटिया ने पीठ से आग्रह किया कि यह अस्वीकार्य है कि उच्चतम न्यायालय राजनीतिक जुलूस के मामले से निपट रहा है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को डराने-धमकाने की कोशिशों को स्वीकार नहीं किया जा सकता। इस पर न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, 'हमें कोई डरा-धमका नहीं सकता।' याचिका में अदालत परिसर के भीतर राजनीतिक प्रदर्शनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने वाले नेताओं के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का अनुरोध किया गया है।