महिला पत्रकार का आरोप
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ महिला पत्रकार ऋचा पाराशर ने नई दिल्ली के डीसीपी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट मार्च के दौरान उनके साथ दुर्व्यवहार किया। शिकायत में उल्लेख किया गया है कि 12 अक्तूबर को जब वह विपक्ष के मार्च की कवरेज कर रही थीं, तब उन्हें इस घटना का शिकार होना पड़ा।
इस घटना के संदर्भ में जानकारी दी गई है कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ आक्रोश व्यक्त करते हुए सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया था।
घटना का विवरण
इस मामले का जिक्र 12 अक्तूबर 2026 को इंडिया ब्लॉक से सुप्रीम कोर्ट की ओर किए गए मार्च के दौरान की गई घटना से है। पत्रकार ऋचा पाराशर ने बताया कि उस दिन विपक्ष का प्रदर्शन कवर करते समय राहुल गांधी ने उन्हें पकड़कर खींचा। इसके बाद उनके सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें धक्का दिया, जिससे वह गिर गईं और उनका फोन भी टूट गया।
महिला पत्रकार ने इस घटना में चोटिल होने का भी दावा किया है। ऋचा ने कहा कि वह इस समय तीन महीने की गर्भवती हैं और गिरने की वजह से उन्हें पेट में दर्द और अन्य चोटों का सामना करना पड़ा। इतना अधिक दर्द होने के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।
कांग्रेस का बचाव
कांग्रेस पार्टी ने महिला पत्रकार द्वारा लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद और राजनीतिक प्रेरणाओं से भरा हुआ बताया है। पार्टी और राहुल गांधी के समर्थकों का कहना है कि इस घटना से संबंधित किसी भी वीडियो फुटेज में यह स्पष्ट नहीं है कि पत्रकार को जानबूझकर धक्का दिया गया है। इसके अलावा, आरोपों में कुछ विसंगतियां भी मौजूद हैं।
सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचा
भाजपा द्वारा भी इस मामले को उठाया गया है। भाजपा नेता और सुप्रीम कोर्ट के वकील गौरव भाटिया ने महिला पत्रकार की ओर से इस मामले को कोर्ट में प्रस्तुत किया। उन्होंने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से मामले की शीघ्र सुनवाई करने की प्रार्थना की। इसके परिणामस्वरूप, उच्च न्यायालय ने 26 अक्तूबर को सुनवाई करने पर सहमति जताई है।





