नेहा बोरा की उपस्थिति से कांग्रेस में बहस
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दलों द्वारा निकाले गए मार्च में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा की उपस्थिति ने कांग्रेस के अंदर नई बहस को जन्म दिया है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की ओर बढ़ते इस मार्च में नेहा बोरा, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ नजर आईं। इस दौरान कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता भी तस्वीर में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का प्रयास करते दिखे।
इस घटना ने विशेष रूप से कांग्रेस के छात्र संगठन नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के भीतर सवाल उठाए हैं। NSUI के कुछ सदस्यों का मानना है कि AISA की अध्यक्ष को जिस तरह से प्रमुखता दी गई, उससे उनके संगठन की अहमियत कम दिखी है।
राजनीतिक रणनीति का हिस्सा
कांग्रेस के कुछ नेताओं का मानना है कि यह कदम राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था। उनके अनुसार, इससे प्रदर्शन के केंद्र में कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन INDIA की भूमिका मजबूत हुई। इस पूरे घटनाक्रम के पीछे वामपंथी छात्र राजनीति से जुड़े नेताओं को महत्व देने की रणनीति और कांग्रेस के सामाजिक आधार को विस्तारित करने के प्रयास शामिल हैं।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस के एक नेता ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि नेहा बोरा को प्रमुखता देने के पीछे एक राजनीतिक योजना थी। उनके मुताबिक, यह कदम 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) को आंदोलनों का मुख्य केंद्र बनने से रोकने में सहायक साबित होगा।
वामपंथी नेताओं की स्थिति पर सवाल
कांग्रेस के भीतर नेहा बोरा को मिल रही तवज्जो का एक कारण यह भी है कि पार्टी में वामपंथी छात्र संगठनों से जुड़े नेताओं को लगातार महत्व दिया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, गांधी परिवार के नेतृत्व में वामपंथी पृष्ठभूमि के कई व्यक्तियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
इनमें AISA के नेता और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (JNUSU) के पूर्व अध्यक्ष संदीप सिंह, मोहित पांडे और अकबर चौधरी शामिल हैं। संदीप सिंह अब प्रियंका गांधी वाड्रा की टीम में हैं। वहीं, JNU में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) का नेतृत्व कर चुके प्रसेनजीत बोस भी कांग्रेस के साथ जुड़े हुए हैं।
NSUI की स्थिति और AISA का विरोधाभास
कन्हैया कुमार की भूमिका भी हाल के दिनों में सवालों के घेरे में रही है, खासतौर पर दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र चुनावों में NSUI के खराब प्रदर्शन के बाद। इसके चलते कन्हैया को प्रदर्शनों से किनारे किए जाने की चर्चा हुई।
दिलचस्प बात यह है कि AISA की वेबसाइट पर NSUI को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के साथ दक्षिणपंथी और जनविरोधी संगठनों के रूप में वर्गीकृत किया गया है। AISA के घोषणापत्र में NSUI और ABVP जैसे संगठनों के खिलाफ संघर्ष की बात कही गई है, जिससे कांग्रेस के कुछ नेताओं को AISA जैसे संगठनों से नेताओं को पार्टी में लाने की रणनीति पर आपत्ति है।





