शेयर बाजार में भारी गिरावट का जिक्र
खड़गे ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, "2025 में अब तक भारतीय शेयर बाजारों से 45 लाख करोड़ रुपये का सफाया हो चुका है। निफ्टी 50 कंपनियों ने बीते पांच वर्षों में सबसे खराब तिमाही लाभ वृद्धि दर्ज की है। विदेशी निवेशकों ने पिछले साल अक्टूबर से अब तक 1.56 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं, जिसमें 2025 में ही करीब 1 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली हुई है। इसका खामियाजा छोटे और मध्यम निवेशकों को उठाना पड़ रहा है, जिनकी संपत्ति तेजी से घट रही है।"
बीएसई सेंसेक्स में भी लगातार गिरावट देखी गई है। 1 जनवरी से अब तक यह 3% तक गिर चुका है और मंगलवार को 75,967.39 के स्तर पर बंद हुआ।
सीतारमण के बयान पर तंज
सोमवार को बजट के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा भारतीय बाजार से पूंजी निकासी पर सफाई दी थी। उन्होंने कहा था कि जब किसी अर्थव्यवस्था में मजबूत वृद्धि होती है, तो निवेशक मुनाफा लेने के लिए बाहर निकलते हैं। उन्होंने दावा किया कि भारत में मौजूदा निवेश माहौल सकारात्मक है और बाजार “अच्छा रिटर्न” दे रहा है।
हालांकि, खड़गे ने इस तर्क को खारिज करते हुए सरकार पर हमला बोला और कहा कि अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति को देखकर यह कहना विडंबनापूर्ण है कि निवेशकों के बाहर जाने का मतलब मजबूत अर्थव्यवस्था है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने रुपये के अवमूल्यन और इसके व्यापार घाटे पर प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस साल अब तक भारतीय मुद्रा 1.3% गिर चुकी है और मंगलवार को यह डॉलर के मुकाबले 86.94 रुपये पर बंद हुआ।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने बीते एक दशक में कॉरपोरेट टैक्स में करीब 10 लाख करोड़ रुपये की कटौती की, इस उम्मीद में कि कंपनियां अधिक नौकरियां पैदा करेंगी। लेकिन हकीकत यह है कि टैक्स कटौती का फायदा उठाने वाली नौ में से आठ कंपनियों ने नौकरियों में कमी की है।
‘मेक इन इंडिया’ और PLI योजना को बताया असफल
खड़गे ने वैश्विक टैरिफ युद्ध की आशंका जताते हुए कहा कि इसका भारतीय अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है। उन्होंने देश के विनिर्माण क्षेत्र की मौजूदा स्थिति की आलोचना करते हुए इसे "डूबता हुआ" बताया और ‘मेक इन इंडिया’ व ‘उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं’ को पूरी तरह विफल करार दिया।
उन्होंने अंत में कहा, "दृष्टिहीन, दिशाहीन और नीतिहीन मोदी सरकार ने भारतीय अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दिया है और आम जनता की जिंदगी मुश्किल बना दी है।"
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