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PM Modi Statement: आपातकाल को बताया लोकतंत्र पर सीधा हमला, दिया बयान

PM Modi Statement में आपातकाल को लोकतंत्र पर सीधा हमला बताया गया, 25 जून 1975 का वह दौर आज भी भारतीय लोकतंत्र के काले अध्याय के रूप में याद किया जाता है।

PM Modi Statement: आपातकाल को बताया लोकतंत्र पर सीधा हमला, दिया बयान
फोटो: Emergency anniversary recalled, Constitution assault remark
PM Modi Statement: 25 जून भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास की उन महत्वपूर्ण तारीखों में शामिल है, जिसे लेकर आज भी व्यापक चर्चा होती है। वर्ष 1975 में इसी दिन देश में आपातकाल लागू किया गया था। इस निर्णय ने न केवल देश की राजनीतिक दिशा को प्रभावित किया, बल्कि नागरिक अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए थे। आज, 25 जून 2026 को उस घटना के 51 वर्ष पूरे हो गए हैं। 

इस अवसर पर प्रधानमंत्री Narendra Modi ने आपातकाल को भारतीय संविधान और लोकतंत्र पर सीधा हमला करार देते हुए उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने उस कठिन दौर में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष किया।

PM Modi Statement: पीएम मोदी ने याद किया आपातकाल का दौर 

Congress Emergency Criticism: आपातकाल की 51वीं वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री Narendra Modi ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने कहा कि देश आज उन सभी लोगों को नमन करता है जिन्होंने भारत के इतिहास के सबसे कठिन और अंधकारमय अध्यायों में से एक के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए आवाज उठाई।

प्रधानमंत्री के अनुसार, आपातकाल केवल एक राजनीतिक निर्णय नहीं था, बल्कि यह संविधान की मूल भावना और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा आघात था। उन्होंने कहा कि उस समय देश ने नागरिक स्वतंत्रताओं पर प्रतिबंध, अभिव्यक्ति की आजादी पर अंकुश और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव जैसे कई घटनाक्रम देखे थे।

 

नागरिक अधिकारों पर पड़े थे व्यापक प्रभाव

Democracy Under Threat: प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में उस दौर की कई महत्वपूर्ण घटनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान राजनीतिक नेताओं, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सरकार के आलोचकों को गिरफ्तार किया गया था। प्रेस की स्वतंत्रता सीमित कर दी गई थी और आम नागरिकों के कई मौलिक अधिकार प्रभावित हुए थे। 

उनके मुताबिक, यह समय भारतीय लोकतंत्र के लिए एक कठिन परीक्षा जैसा था, जब लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों पर व्यापक असर पड़ा। हालांकि, इस चुनौतीपूर्ण दौर में अनेक लोगों ने लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक आदर्शों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखा।

लोकतंत्र रक्षकों के साहस को किया याद

प्रधानमंत्री Modi ने उन नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नेताओं के योगदान को भी याद किया जिन्होंने आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए आवाज बुलंद की। उन्होंने कहा कि देश उन अनगिनत लोगों का सदैव ऋणी रहेगा जिन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद संविधान की भावना को जीवित रखने का प्रयास किया। 

उन्होंने कहा कि इन लोगों का साहस और लोकतंत्र के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी निष्ठा भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक है।

संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई 

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने अपने संदेश में संविधान के महत्व पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं, अधिकारों और कर्तव्यों का प्रतिनिधित्व करता है।

उन्होंने कहा कि देश संविधान में निहित आदर्शों और मूल्यों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। भारत न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व जैसे सिद्धांतों को आगे बढ़ाते हुए एक मजबूत और समावेशी राष्ट्र के निर्माण की दिशा में निरंतर कार्य करता रहेगा। प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि संविधान की भावना से प्रेरित होकर देश विकास और लोकतंत्र दोनों के मार्ग पर आगे बढ़ता रहेगा।

क्या था 1975 का आपातकाल? 

भारत में आपातकाल की घोषणा 25 जून 1975 को की गई थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री Indira Gandhi की सिफारिश पर उस समय के राष्ट्रपति Fakhruddin Ali Ahmed ने संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत देश में आपातकाल लागू करने की मंजूरी दी थी। इसके पीछे 'आंतरिक अशांति' को आधार बताया गया था। 

आपातकाल की अवधि लगभग 21 महीने तक चली। यह 25 जून 1975 से शुरू होकर 21 मार्च 1977 तक प्रभावी रहा। इस दौरान केंद्र सरकार को व्यापक अधिकार प्राप्त हो गए थे और कई लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर असर पड़ा था।

51 साल बाद भी जारी है चर्चा 

आपातकाल समाप्त हुए लगभग पांच दशक बीत चुके हैं, लेकिन यह घटना आज भी भारतीय राजनीति और लोकतंत्र के इतिहास में एक महत्वपूर्ण संदर्भ बनी हुई है। हर वर्ष 25 जून को इस दौर को याद किया जाता है और लोकतंत्र, संविधान तथा नागरिक अधिकारों की अहमियत पर चर्चा होती है। 

आपातकाल की 51वीं वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री Narendra Modi का संदेश एक बार फिर इस बात को रेखांकित करता है कि लोकतंत्र की मजबूती केवल संस्थाओं से नहीं, बल्कि उन नागरिकों से भी तय होती है जो संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए खड़े रहते हैं।

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