Molitics Logo
होम राष्ट्रीय Parliament Winter session Day 6 — संसद में ‘वंदे मातरम्’ पर विशेष बहस की शुरुआत, PM मोदी आज करेंगे उद्घाटन
राष्ट्रीय

Parliament Winter session Day 6 — संसद में ‘वंदे मातरम्’ पर विशेष बहस की शुरुआत, PM मोदी आज करेंगे उद्घाटन

संसद के शीतकालीन सत्र का छठा दिन (Parliament Winter session Day 6) आज देश के लिए ऐतिहासिक मोड़ लेकर आया है। Lower House, यानी लोकसभा में राष्ट्रगीत....|

Parliament Winter session Day 6 — संसद में ‘वंदे मातरम्’ पर विशेष बहस की शुरुआत, PM मोदी आज करेंगे उद्घाटन
फोटो: Parliament Winter Session Day 6

Parliament Winter session Day 6: लोकसभा में ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ पर 10 घंटे की विशेष चर्चा


संसद के शीतकालीन सत्र का छठा दिन (Parliament Winter session Day 6) आज देश के लिए ऐतिहासिक मोड़ लेकर आया है। Lower House, यानी लोकसभा में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर विशेष रूप से 10 घंटे की विस्तृत चर्चा जारी है। इस बहस को लेकर पहले से ही कार्यसूची तय की जा चुकी थी और संसद अध्यक्ष द्वारा इसे मंजूरी दी गई थी।

‘वंदे मातरम्’ सिर्फ एक गीत नहीं है — यह देश की आज़ादी, राष्ट्रीयता और एकता की भावना का प्रतीक है। इस बहस का उद्देश्य न केवल इसके ऐतिहासिक महत्व को याद करना है, बल्कि आज के भारत में इसके सांस्कृतिक, सामाजिक और राजनीतिक प्रासंगिकता पर अलग-अलग दृष्टिकोणों और अनुभवों को सामने लाना भी है। सदन में निर्धारित 10 घंटे की बहस के दौरान, सांसदों द्वारा इस गीत के साहित्यिक इतिहास, स्वतंत्रता आंदोलन में इसके योगदान, विवादित पहलुओं और आधुनिक संदर्भों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

सरकार ने इस बहस के लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया है, जिसमें से तीन घंटे सरकार/सत्तापक्ष (NDA) के लिए आरक्षित हैं। बाकी समय का उपयोग विपक्ष और अन्य दलों द्वारा किया जाएगा।

PM मोदी करेंगे बहस की शुरुआत, विपक्ष और मंत्री तैयार


आज दोपहर 12 बजे, प्रधानमंत्री Narendra Modi लोकसभा में ‘वंदे मातरम्’ पर बहस का उद्घाटन करेंगे। यह बहस पारंपरिक बहसों से अलग होगी क्योंकि इसमें सिर्फ राजनीतिक मुद्दे ही नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत, साहित्यिक गौरव, और राष्ट्रीय पहचान पर भी चर्चा होगी।

सत्तापक्ष की ओर से बहस के बाद, रक्षा मंत्री Rajnath Singh सभा को समापन भाषण देंगे। वहीं, विपक्षी दलों से कई सांसद इस बहस में शामिल होंगे — इनमें Gaurav Gogoi और Priyanka Gandhi Vadra प्रमुख रूप से शामिल हैं। इसके अलावा कांग्रेस के अन्य सांसद जैसे दीपेंद्र हुड्डा, विमोल अकोइजाम, प्रणिति शिंदे, प्रशांत पडोले, चमला रेड्डी और ज्योत्सना महंत भी बहस में हिस्सा लेंगे।

हालाँकि बहस की शुरुआत पारंपरिक तरीके से हो रही है, लेकिन पिछले हफ्तों में ‘वंदे मातरम्’ को लेकर हुए बयान-बाजी और आरोप-प्रत्यारोप ने बहस को संवेदनशील बना दिया है। PM मोदी ने आरोप लगाया है कि 1937 में इस गीत से कुछ छंद हटा दिए गए थे, जो देश की एकता और सामाजिक सामंजस्य के लिए हानिकारक साबित हुए। विपक्ष ने इस फैसले की आलोचना की है, जिससे बहस में राजनीतिक एवं सांस्कृतिक दोनों तरह के आघात की संभावना है।

वंदे मातरम् का इतिहास, विवाद और आधुनिक प्रासंगिकता फिर चर्चा का केंद्र


‘वंदे मातरम्’ की यात्रा 150 साल पुरानी है। इसे पहली बार 7 नवंबर 1875 को साहित्यिक पत्रिका “Bangadarshan” में प्रकाशित किया गया था। इस गीत के रचयिता थे Bankim Chandra Chatterjee। बाद में इसे राष्ट्रीय आंदोलन का एक शक्तिशाली प्रतीक बना दिया गया, विशेष रूप से उन छात्रों और क्रांतिकारियों द्वारा जिन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ आवाज़ उठाई। 1905 से 1947 तक ‘वंदे मातरम्’ स्वतंत्रता संग्राम का एक अमिट नारा बन गया।

लेकिन 1937 में एक विवादास्पद फैसला लिया गया — कहा जाता है कि इस गीत के कई महत्वपूर्ण छंद हटा दिए गए थे, ताकि कुछ धार्मिक/सामुदायिक संवेदनाओं का सामना करना पड़े। उस समय के निर्णयों ने विवाद खड़ा कर दिया था, और आज 150वीं वर्षगांठ पर वही विवाद फिर से उठ खड़ा हुआ है। इस बहस में, ‘वंदे मातरम्’ के उन छंदों की अहमियत, उनके हटाने के कारण, और उस निर्णय के पीछे की सोच पर बहस होगी। सरकार का कहना है कि उस फैसले ने विभाजन के बीज बोए; वहीं विरोधी दल इसे सांकेतिक रूप में ‘संक्रमित इतिहास’ कहना पसंद कर रहे हैं।

आन्दोलन से लेकर आज के भारत में ‘वंदे मातरम्’ की प्रासंगिकता कई मायनों में बनी हुई है। एक ओर यह गीत आज़ादी, देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है; वहीं दूसरी ओर, उसकी संवेदनशीलता — धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता के संदर्भ में — भी चर्चा का विषय बनी हुई है। वर्तमान बहस में, सांसद यह देखेंगें कि क्या ‘वंदे मातरम्’ सिर्फ इतिहास का गौरव है, या यह आज भी भारतीय विविधता, सहिष्णुता और आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए प्रासंगिक है।

सरकार की मंशा है कि इस बहस के माध्यम से युवाओं, छात्रों और आम नागरिकों को ‘वंदे मातरम्’ की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्ता से अवगत कराया जाए। वहीं विपक्ष इस बहस को अवसर के रूप में देख रहा है कि वह अपने दृष्टिकोण और उन मान्यताओं को पुन: प्रस्तुत कर सके, जो देश की विविधता और समावेशिता पर आधारित हैं।