राहुल गांधी का धरना और सरकार की जवाबदेही
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को सरकार के खिलाफ अपनी आक्रामक रणनीति को जारी रखते हुए कहा कि वह लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में सरकार को जवाबदेह ठहराने का संवैधानिक कर्तव्य निभा रहे हैं। 20 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन से घायल हुए युवक के मामले में प्राथमिकी दर्ज की, जिसके बाद राहुल गांधी का धरना समाप्त हो गया।
दिल्ली के संसद मार्ग पर पुलिस उपायुक्त कार्यालय के बाहर उनका धरना समाप्त होने के बाद, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, 'अगर विपक्ष का नेता विरोध नहीं करेगा, तो उसका क्या फायदा?'
उमर अब्दुल्ला की आलोचना
राहुल गांधी के लगातार विरोध के बारे में पूछे जाने पर उमर अब्दुल्ला ने मीडिया में विपक्षी नेताओं के प्रति दोहरे मापदंडों पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जबकि पत्रकार जम्मू-कश्मीर में विपक्षी नेता सुनील शर्मा द्वारा उठाए गए 'बेवजह' सवालों का मजा लेते हैं, वहीं राहुल गांधी के इरादों पर सवाल उठाए जाते हैं।
उमर ने स्पष्ट किया, 'आप विपक्षी नेताओं को इस तरह अलग-अलग पैमानों से नहीं तौल सकते। राहुल गांधी वही कर रहे हैं जिसकी देश उनसे उम्मीद करता है।' उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष के नेता का मुख्य कार्य सत्ता में बैठे लोगों से जवाब मांगना है।
राकांपा की मांग
इस बीच, महाराष्ट्र में विपक्षी पार्टी राकांपा (शरदचंद्र पवार) ने दिल्ली में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल से घायल हुए युवक साहिल लोचब के मामले की पूरी जांच की मांग की। राकांपा (एसपी) के प्रवक्ता क्लाइड क्रास्टो ने कहा कि इस मामले में दिल्ली पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज करने का स्वागत किया गया है, लेकिन जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि पैलेट गन के इस्तेमाल का आदेश किसने दिया था।
उन्होंने जांच की निष्पक्षता पर जोर देते हुए कार्रवाई की मांग की, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।





