Molitics Logo
होम राष्ट्रीय नेहरू का विकल्प या कांग्रेस का इंतजाम? पीएम मोदी का सिंधु जल संधि को लेकर बड़ा हमला
राष्ट्रीय

नेहरू का विकल्प या कांग्रेस का इंतजाम? पीएम मोदी का सिंधु जल संधि को लेकर बड़ा हमला

भारत के पीएम मोदी ने सिंधु जल संधि को लेकर कांग्रेस और नेहरू पर सीधा वार किया है। पीएम मोदी ने कहा कि संधि में भारत ने अपने 80 प्रतिशत जल संसाधनों का नुकसान किया

नेहरू का विकल्प या कांग्रेस का इंतजाम? पीएम मोदी का सिंधु जल संधि को लेकर बड़ा हमला
फोटो: नेहरू का विकल्प या कांग्रेस का इंतजाम? पीएम मोदी का सिंधु जल संधि को लेकर बड़ा हमला
भारत के पीएम मोदी ने सिंधु जल संधि को लेकर कांग्रेस और नेहरू पर सीधा वार किया है। पीएम मोदी ने कहा कि संधि में भारत ने अपने 80 प्रतिशत जल संसाधनों का नुकसान किया, और यह एक गम्भीर भूल के साथ-साथ देश के राष्ट्रीय हितों पर सीधा आघात है। देश की हितैषी नीतियों में ऐसा हस्ताक्षर धोखा है, और इस धोखे के दौरान कांग्रेस ने किसानों, कृषिजातियों और आम जनता के साथ अविश्वस्त किया। उनके इस बयान ने जल नीति की छोटी सी सीपी को न केवल सीपी के भीतर, कांछ की झीनी सी सीपी को चर्चा के लिए हटा दिए।

सिंधु जल संधि: नेहरू ने कैसे देश के जल का हिस्सा गवा दिया


सिंधु जल संधि को भारत-पाक के बीच समझौता समझा जाता है। 1960 में हुए इस समझौते के भीतर भारत के पास रवि, ब्यास और सतलज नदियों का शौक हुआ, पर पाकिस्तान ने सिंधु, झेलम और चिनाब को अपने हिसाब से संधुयुक्त कर दिया। इसका सीधा मतलब निकला कि भारत को अपने जल संसाधनों का सिर्फ 20% भाग मिला, जबकि पाकिस्तान को 80% जल आसानी से मिल गया। यह असंतुलन लगातार हमारे कृषि क्षेत्रों को प्रभावित करता रहा, खासकर उन्हीं क्षेत्रों में जहां किसान पूरी तरह से जल पर निर्भर हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में यह साफ किया कि इस संधि ने भारत को अपने बांधों से गाद हटाने का काम भी बंद करने पर मजबूर किया। इससे बांधों की भरने की क्षमता लगातार घट रही है। कई स्थानों पर बांधों के गेट्स को वेल्ड कर दिया गया, जिससे आवश्यक मात्रा में जल का प्रवाह भी घट गया। यह स्थिति जम्मू-कश्मीर एवं अन्य राज्यों में सिंचाई और विद्युत उत्पादन को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है।

नेहरू की नीति पर विवाद और  पीएम मोदीकी नई रणनीति


नेहरू की इस नीति पर कई विश्लेषक अब भी गहरे असहमति रखते हैं। असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा सरमा इसे भारत के लिए एक रणनीतिक सत्ता का दाग मानते हैं, जो अंततः जल सुरक्षा को सीमित करता है। उनके अनुसार, एक कट्टरपंथी पुनर्विलंब आवश्यक है। इस पर प्रतिक्रिया के तौर पर मोदी सरकार ने हाल में सिंधु जल संधि का निलंबन और जल सुरक्षा की नई रणनीति का ऐलान किया है। प्रधानमंत्री मोदी का उद्देश्य किसानों के अधिकारों और राष्ट्रीय सुरक्षा को एकल प्राथमिकता देना है। उन्होंने भाषण में वाक्य का प्रयोग कर इसे स्पष्ट कर दिया है। उनका तर्क रहा है कि नीति अब सुरक्षा के व्यापक विचार पर निर्भर है।

 विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी इस संधि के निलंबन को तार्किक बताया है। उन्होंने जारी बयान में इसे पुरानी भूलों का दुरुस्त करार दिया और बताया कि भविष्य में जल समझौतों में किसी तरह का विशेष लाभ देश की जल प्रणाली को हानि सहन करने नहीं दिया जाएगा। राज्य का अधिकार और संप्रभुता प्राथमिकता के बिंदु पर रखी गई हैं। अंतरराष्ट्रीय न्यायालयों में मामले का मागने का हक भी अब से नहीं दिया जाएगा। सरसंख्य के तहत प्रावधान से सरकार ने यह सुरक्षा सुनिश्चित कराई है। संधि के निलंबन की सीधे सरहद पर किसानों को सहूलियत समझ में आएगी। नई जल योजनाओं, तात्कालिक मत, जो अपनी नदियों का एकीकरण कर सकते हैं, उन्हें मौके मिलेंगे। निस्संदेह, यह विकर्ण के विजय में एक नयी दिशा का संकेत है।

सिंधु जल संधि के निलंबन का प्रभाव और भविष्य की दिशा


सिंधु जल संधि पर भारत का हाल का निलंबन कदम अब उम्मीद जगाता है कि किसानों को जल संकट से तात्कालिक राहत मिलेगी। बार-बार की पानी की कमी जिस से धान और गेंहू जैसी फसलों पर असर डाला करती थी, अब अपनी शक्ति खो रही है। नई नीतियों में सिंचाई के बुनियादी ढांचे को तंत्रशील बनाया जा रहा है, और जोर उसी प्रौद्योगिकी पर है जो जल का अधिकतम संरक्षण करती है। टोनबन्दी के साथ आ रहा यह कदम पूरी खेती-आधारित अर्थव्यवस्था के संरक्षण की दिशा में महत्त्वपूर्ण है।

सिंधु जल की धारा पर राज्य की सुरक्षा का नया अर्थ दिया गया है। कुछ ही दिनों में हुई आतंकवादी गतिविधियों के बाद भारत की तगड़ी प्रतिक्रिया से यह संदेश गया है कि सीमाएँ केवल भूमि की नहीं, बल्की जल की भी होती हैं। जब नीतियों का तानाबाना पर्यावरणीय और सामरिक दोनों दृष्टियों को जोड़ता है, तब राष्ट्र की सुरक्षा एक नई डान्टिंस बुनती है। पाकिस्तान से जल संधि के बूँद-बूँद की भी प्रबंधन के साथ भारत ने स्पष्ट कर दिया के जल केवल खेती नहीं, बल्की जीवन और प्राण है।