किराना हिल्स पर हमले की अफवाहें
किराना हिल्स हमला: पूर्व प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान ने मंगलवार को बताया कि भारतीय सेना ने पाकिस्तान के किराना हिल्स को 'निशाना नहीं बनाया', जहां एक संभावित परमाणु प्रतिष्ठान स्थित है। उन्होंने कहा कि वास्तव में, सरगोधा की दिशा में कई आत्मघाती ड्रोन भेजे गए थे, जिनमें से एक संभवतः अपनी उड़ान क्षमता खोकर एक पहाड़ी से टकरा गया होगा।
जनरल चौहान ने 'ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद के हालात' पर चर्चा के दौरान एयर मार्शल एके भारती का समर्थन किया। एयर मार्शल भारती ने पिछले साल 12 मई को मीडिया को बताया था कि भारतीय वायुसेना ने किराना हिल्स पर कोई हमला नहीं किया है, चाहे वहां क्या भी मौजूद हो।
एयर मार्शल भारती का स्पष्टीकरण
किराना हिल्स हमला: एयर मार्शल भारती, जो 31 जुलाई को उप वायुसेना प्रमुख के पद से सेवानिवृत्त हुए, ने सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों का जवाब दिया। इनमें कहा गया था कि भारत ने 'किराना हिल्स' पर हमला किया, जो एक कथित परमाणु हथियार भंडारण केंद्र है।
उन्होंने कहा कि इस विषय पर उन्होंने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि किराना हिल्स को निशाना नहीं बनाया गया। जनरल चौहान ने इस पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कई बार यह प्रश्न उठाया गया है कि क्या किराना हिल्स पर हमला हुआ था, और एयर मार्शल भारती ने सही जानकारी दी।
ऑपरेशन सिंदूर का संदर्भ
चौहान ने जानकारी दी कि 22 अप्रैल के पहलगाम आतंकी हमले का प्रतिशोध लेने के लिए मई 2025 में भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में नौ आतंकी ठिकानों के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर चलाया। इस ऑपरेशन में 100 से अधिक आतंकवादी मार गिराए गए थे।
उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 29 अप्रैल को हुई बैठक में यह तय किया गया कि हमें पाकिस्तान को एक बड़ा सबक सिखाना चाहिए और इसके लिए 'अकल्पनीय' कदम उठाने चाहिए।'
बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण फैसले
किराना हिल्स हमला: चौहान ने बताया कि इस बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने निर्देश दिया था कि कार्रवाई अपने समय पर की जाए, लेकिन विफलता की कोई गुंजाइश न हो। बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी उपस्थित थे।
उन्होंने कहा, '29 अप्रैल की बैठक में बहावलपुर के लक्ष्य को भी विशेष रूप से सूची में शामिल किया गया था। यह निर्णय रक्षा मंत्री के दबाव में लिया गया था।'
सैन्य कार्रवाई की योजना
जनरल चौहान ने जानकारी दी कि 23 से 29 अप्रैल के बीच कई महत्वपूर्ण बैठकें हुईं, जिसमें सीडीएस, तीनों सेना प्रमुख, रक्षा मंत्री और एनएसए शामिल थे। उन्होंने कहा, 'हमारे पास कई विकल्प थे जिन पर चर्चा की गई थी और अंततः बहावलपुर का लक्ष्य सूची में डाला गया।'
यह पहली बार है जब जनरल चौहान ने उस बैठक के भीतर लिए गए निर्णयों का खुलासा किया है, जो मई 2025 में भारत द्वारा पाकिस्तान में की गई सैन्य कार्रवाई से पहले हुई थी।
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