विदेशी मीडिया में CJP के प्रदर्शन की चर्चा
भारत में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शनों की गूंज पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी सुनाई दे रही है। पाकिस्तान की मीडिया ने सोमवार को सीजेपी के संसद मार्च को व्यापक रूप से कवर किया है। इसके साथ ही, अमेरिका और यूरोप के कई प्रमुख समाचार पत्रों और टेलीविजन चैनलों ने इस प्रदर्शन की जानकारी दी है।
विदेशी मीडिया ने उल्लेख किया है कि यह प्रदर्शन हाल के वर्षों में नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ सबसे बड़ा विरोध है। रिपोर्टों में पुलिस की सख्ती, राजधानी में इंटरनेट शटडाउन और पड़ोसी देशों में हुए 'जेन-जी' प्रदर्शनों की तुलना की गई है।
पाकिस्तानी मीडिया की विशेष टिप्पणियाँ
पाकिस्तान के प्रमुख समाचार पत्र 'द डॉन' ने इस विरोध को भारत में MP Modi के खिलाफ युवाओं का एक महत्वपूर्ण विद्रोह बताया है। अखबार के अनुसार, यह पहली बार है जब एक 'वायरल ऑनलाइन यूथ मूवमेंट' ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया है। 'द डॉन' ने CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके के अमेरिका से भारत लौटकर 'भारत का संविधान' लेकर प्रदर्शन स्थल पर पहुंचने का भी उल्लेख किया है।
इसके अलावा, पाकिस्तान के जियो.टीवी ने इस आंदोलन के बारे में लिखा कि 'भारत के 'कॉकरोच' आंदोलन ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक विरोध जारी रखने की प्रतिज्ञा की है।' चैनल ने एएफपी की खबर को उजागर करते हुए कहा कि नई दिल्ली में हुए प्रदर्शन में कम से कम 180 लोग घायल हुए।
अमेरिकी मीडिया की प्रतिक्रियाएँ
अमेरिकी समाचार पत्र 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' ने रिपोर्ट किया है कि वहीं एक तरफ दिल्ली में अफरा-तफरी का माहौल था, वहीं दूसरी तरफ संसद में पीएम मोदी ने शांति की छवि प्रस्तुत करने का प्रयास किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि भाजपा ने भारत के युवाओं के गुस्से को कमतर आंकने की गलती की है और पीएम मोदी की 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि में दरारें दिखने लगी हैं।
अखबार ने सरकार समर्थक टीवी चैनलों पर भी यह आरोप लगाया कि उन्होंने पहले इस प्रदर्शन को नजरअंदाज किया और बाद में संसद के आसपास के हालात को भयावह बताया।
रिपोर्ट्स में प्रदर्शन के दृश्य
बीबीसी ने रिपोर्ट में जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के संघर्ष को दर्शाया, जिसमें पुलिस की भारी घेराबंदी के बीच वे तिरंगा और तख्तियां लिए हुए थे। कई प्रदर्शनकारी पुलिस द्वारा धकेले जाने पर घायल हुए, और बीबीसी ने इसे पीएम मोदी के खिलाफ असंतोष का सबसे बड़ा रूप बताया है।
फाइनेंशियल टाइम्स ने भीड़ पर आंसू गैस के गोले छोड़ने और पुलिस की लाठियों के प्रयोग का उल्लेख किया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि प्रदर्शनकारियों ने नारा दिया, 'जब भी मोदी डरता है, पुलिस को आगे करता है।'
आर्थिक समाचार पत्रों की चेतावनियाँ
बिजनेस न्यूज पब्लिकेशन 'ब्लूमबर्ग' ने चेतावनी दी है कि प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों से पीछे हटने से इनकार कर दिया है, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ गया है। ब्लूमबर्ग का मानना है कि यह असंतोष अगले साल होने वाले चुनावों पर प्रभाव डाल सकता है।
वॉल स्ट्रीट जर्नल ने इस मुद्दे पर अपनी चिंताएँ जताते हुए कहा है कि यह बढ़ता असंतोष पीएम मोदी के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
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