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मॉनसून सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक के पारित होने की उम्मीद: केंद्रीय मंत्री आठवले

केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने कहा है कि संसद के आगामी मॉनसून सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक पारित होंगे। उन्होंने पिछले सत्र में इन विधेयकों के |

मॉनसून सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक के पारित होने की उम्मीद: केंद्रीय मंत्री आठवले
फोटो: Union Minister Athawale, Expectation of Women

महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक की संभावना

केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने विश्वास व्यक्त किया है कि संसद के आने वाले मॉनसून सत्र में महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन विधेयक को पारित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पिछले संसद सत्र में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा) और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने इन संविधान संशोधन विधेयकों को रोकने का प्रयास किया था। बुधवार को हैदराबाद में आयोजित एक प्रेस वार्ता में आठवले ने बताया कि अब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पास स्पष्ट बहुमत है।


आठवले ने कहा, 'आगामी सत्र में महिला आरक्षण विधेयक फिर से लाया जाएगा और 2029 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं को आरक्षण का लाभ मिलने की उम्मीद है।' उन्होंने यह भी बताया कि हर 30-35 वर्षों में परिसीमन किया जाता है और यह आवश्यक प्रक्रिया है।


राजग के समर्थन से विधेयकों की संभावनाएं

महाराष्ट्र के वरिष्ठ नेता और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सहयोगी रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) के अध्यक्ष रामदास आठवले ने आगे कहा कि तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (UBT) के कुछ सदस्यों द्वारा राजग का समर्थन मिलने से विधेयकों के पारित होने की संभावना में वृद्धि हुई है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के कांग्रेस से अलग होने को भी इस संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया।


उन्होंने स्पष्ट किया, 'हमारे पास दो-तिहाई बहुमत है। महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन विधेयक दोनों पारित होंगे।' इसके साथ ही, आठवले ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों से भी इन विधेयकों के पारित होने में सहयोग की अपील की।


पिछले सत्र में विधेयक का अस्वीकृत होना

यह उल्लेखनीय है कि 17 अप्रैल को संसद के विस्तारित सत्र में 2029 से विधानमंडलों में महिलाओं को आरक्षण लागू करने और लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका था। इस विधेयक के पक्ष में 298 सांसदों ने मतदान किया जबकि 230 ने इसके विरोध में वोट दिया। कुल 528 सांसदों ने मतदान किया, जबकि संविधान संशोधन विधेयक के पारित होने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता थी, जो कि 352 मतों की थी।

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