Molitics Logo
होम राष्ट्रीय 4 राज्यों की 28 MLC सीटों पर चुनाव, NDA को 16 और INDIA गठबंधन को 9 सीटें; जानिए कैसे होता है MLC का चुनाव
राष्ट्रीय • दिल्ली

4 राज्यों की 28 MLC सीटों पर चुनाव, NDA को 16 और INDIA गठबंधन को 9 सीटें; जानिए कैसे होता है MLC का चुनाव

28 MLC सीटों पर NDA को 16, INDIA को 9; जानें चुनाव प्रक्रिया

4 राज्यों की 28 MLC सीटों पर चुनाव, NDA को 16 और INDIA गठबंधन को 9 सीटें; जानिए कैसे होता है MLC का चुनाव
फोटो: AI Generated Image

उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक की 28 विधान परिषद सीटों के नतीजों में NDA ने 16 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि INDIA गठबंधन को 9 सीटें मिलीं। जन सुराज ने एक सीट जीती और दो सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे। उत्तर प्रदेश में भाजपा ने 6 और समाजवादी पार्टी ने 5 सीटों पर जीत हासिल की। वहीं, कर्नाटक की चारों सीटें भाजपा और उसकी सहयोगी JDS के खाते में गईं। इन चुनावों के नतीजों के बीच एक सवाल उठता है कि आखिर MLC का चुनाव कैसे होता है? MLA और MLC में क्या अंतर है? क्या MLC को भी आम जनता सीधे वोट देकर चुनती है? आइए, आसान भाषा में समझते हैं।

MLC क्या है और MLA से कैसे अलग है?

MLC का पूरा नाम Member of Legislative Council यानी विधान परिषद का सदस्य है। इसे राज्य विधानमंडल का ऊपरी सदन कहा जाता है। वहीं, MLA का पूरा नाम Member of Legislative Assembly यानी विधानसभा का सदस्य है।

MLA और MLC के बीच सबसे बड़ा अंतर उनके चुनाव की प्रक्रिया का है। MLA को विधानसभा चुनाव में आम मतदाता सीधे वोट देकर चुनते हैं। इसके विपरीत, MLC का चुनाव अलग-अलग मतदाता समूहों के जरिए होता है। कुछ MLC को विधायक चुनते हैं, कुछ को स्थानीय निकायों के प्रतिनिधि, जबकि कुछ सीटों पर स्नातक और शिक्षक मतदाता वोट डालते हैं। इसके अलावा, कुछ सदस्यों को राज्यपाल मनोनीत करते हैं।

भारत के 28 राज्यों में से छह राज्यों में विधान परिषद है। इनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश शामिल हैं। MLC का कार्यकाल 6 साल होता है। विधान परिषद एक स्थायी सदन है, यानी इसे विधानसभा की तरह भंग नहीं किया जाता। इसके करीब एक-तिहाई सदस्य हर दो साल में रिटायर होते हैं। इसके बाद खाली होने वाली सीटों पर नए सदस्यों का चुनाव किया जाता है या उन्हें मनोनीत किया जाता है।

संविधान के अनुच्छेद 168 में राज्यों के विधानमंडल की संरचना का प्रावधान है, जबकि अनुच्छेद 171 में विधान परिषद की संरचना और उसके सदस्यों के चयन का तरीका बताया गया है।

MLC का चुनाव कैसे होता है?

विधान परिषद के सदस्यों का चयन पांच अलग-अलग तरीकों से होता है। संविधान के अनुच्छेद 171 के मुताबिक, विधान परिषद में अलग-अलग वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की व्यवस्था की गई है।

विधान परिषद के करीब एक-तिहाई सदस्यों को राज्य के विधायक चुनते हैं। इस चुनाव में विधानसभा के निर्वाचित सदस्य मतदान करते हैं। करीब एक-तिहाई सदस्यों का चुनाव स्थानीय निकायों के प्रतिनिधि करते हैं। इनमें नगर निगम, नगर पालिका, जिला बोर्ड और अन्य निर्धारित स्थानीय प्राधिकरणों के सदस्य शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा, करीब एक-बारहवें सदस्यों का चुनाव स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों से होता है। इन सीटों पर निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले और मतदाता सूची में पंजीकृत स्नातक वोट डालते हैं। इसी तरह, करीब एक-बारहवें सदस्यों को शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से चुना जाता है। इन सीटों पर निर्धारित शर्तों को पूरा करने वाले पंजीकृत शिक्षक मतदान करते हैं।

विधान परिषद के बाकी करीब एक-छठे सदस्यों को राज्यपाल मनोनीत करते हैं। इसके लिए साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारिता आंदोलन और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव रखने वाले लोगों को चुना जाता है। इस तरह विधान परिषद में विधायकों, स्थानीय निकायों, स्नातकों, शिक्षकों और विभिन्न क्षेत्रों में विशेष अनुभव रखने वाले लोगों को प्रतिनिधित्व मिलता है।

MLC चुनाव में EVM की जगह बैलेट पेपर का इस्तेमाल क्यों होता है?

MLC चुनाव में आम तौर पर EVM की जगह बैलेट पेपर से मतदान कराया जाता है। इन चुनावों में मतदाता सामान्य विधानसभा चुनाव से अलग होते हैं। स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता उम्मीदवारों को अपनी प्राथमिकता के क्रम में वोट देते हैं। इन चुनावों में आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत एकल संक्रमणीय मत पद्धति का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें वोटों की गिनती निर्धारित कोटे और उम्मीदवारों को मिली प्राथमिकताओं के आधार पर होती है। इसलिए इसकी मतगणना सामान्य विधानसभा चुनावों से अलग होती है।

MLC बनने के लिए न्यूनतम उम्र 30 साल होनी चाहिए, जबकि MLA बनने के लिए न्यूनतम उम्र 25 साल निर्धारित है।

चार राज्यों की 28 MLC सीटों पर क्या रहे नतीजे?

उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक की 28 विधान परिषद सीटों पर स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए चुनाव हुआ। मतगणना के बाद चारों राज्यों के नतीजे सामने आए। इन नतीजों में NDA को कुल 16 सीटें मिलीं, जबकि INDIA गठबंधन ने 9 सीटों पर जीत हासिल की।

उत्तर प्रदेश में भाजपा को 6 और सपा को 5 सीटें

उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों पर चुनाव हुआ। यहां भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच मुकाबला देखने को मिला। भाजपा ने 6 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि समाजवादी पार्टी को 5 सीटें मिलीं। वाराणसी की शिक्षक और स्नातक, दोनों सीटों पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। इस तरह उत्तर प्रदेश में भाजपा को 6 और सपा को 5 सीटें मिलीं।

बिहार में NDA को 4 सीटें, जन सुराज ने भी खोला खाता

बिहार में विधान परिषद की 8 सीटों पर चुनाव हुआ। इनमें 4 स्नातक और 4 शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटें थीं। NDA ने कुल 4 सीटों पर जीत दर्ज की। इनमें भाजपा के खाते में 3 और जनता दल यूनाइटेड (JDU) के खाते में 1 सीट गई। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और जन सुराज को एक-एक सीट मिली, जबकि दो सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जन सुराज के उम्मीदवार डॉ. सुरेश प्रसाद राय ने जीत दर्ज की। इसके साथ ही पार्टी ने बिहार विधान परिषद में अपना खाता खोला।

महाराष्ट्र में MVA को 3 और महायुति को 2 सीटें

महाराष्ट्र में विधान परिषद की 5 सीटों पर चुनाव हुआ। यहां विपक्षी महा विकास आघाड़ी (MVA) ने 3 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि सत्ताधारी महायुति को 2 सीटें मिलीं। नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का नतीजा खास रहा। यहां कांग्रेस के अभिजीत वंजारी ने भाजपा के सुधाकर कोहले को 3,271 वोटों से हराया। इस तरह महाराष्ट्र में MVA को तीन और महायुति को दो सीटें मिलीं।

कर्नाटक में भाजपा को 3 और JDS को 1 सीट

कर्नाटक में विधान परिषद की 4 सीटों पर चुनाव हुआ। यहां भाजपा ने 3 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि उसकी सहयोगी जनता दल (सेक्युलर) यानी JDS को 1 सीट मिली। राज्य में कांग्रेस की सरकार है, लेकिन पार्टी इन चारों सीटों में से एक भी सीट नहीं जीत सकी। भाजपा और JDS ने मिलकर सभी चार सीटों पर जीत हासिल की।

28 MLC सीटों का पूरा हिसाब क्या है?

चारों राज्यों के नतीजों को मिलाकर देखें तो NDA ने 28 में से 16 सीटों पर जीत दर्ज की। INDIA गठबंधन को 9 सीटें मिलीं। जन सुराज ने एक सीट जीती, जबकि दो सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहे। इस तरह कुल 28 सीटों में से NDA के खाते में 16, INDIA गठबंधन के खाते में 9, जन सुराज के खाते में 1 और निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में 2 सीटें आईं। इन चुनावों में उत्तर प्रदेश में भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच मुकाबला देखने को मिला। महाराष्ट्र में MVA ने तीन सीटें हासिल कीं, जबकि कर्नाटक में भाजपा और JDS ने सभी चार सीटों पर जीत दर्ज की। बिहार में NDA के अलावा RJD, जन सुराज और निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी सीटें हासिल कीं।

MLC चुनाव सामान्य विधानसभा चुनाव से अलग होते हैं, क्योंकि इनमें आम मतदाताओं के बजाय अलग-अलग वर्गों के मतदाता अपने प्रतिनिधि चुनते हैं। विधायकों, स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों, स्नातकों और शिक्षकों की भागीदारी के साथ-साथ राज्यपाल के मनोनयन की व्यवस्था विधान परिषद को विधानसभा से अलग बनाती है। यही वजह है कि MLC चुनाव की प्रक्रिया और उसके नतीजों को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि किस निर्वाचन क्षेत्र में कौन वोट डालता है और सदस्यों का चयन किस तरह किया जाता है।