टीएमसी नेताओं पर लगातार हमले
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेताओं के खिलाफ हाल के दिनों में हमले बढ़ गए हैं। इस क्रम में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी इस हिंसा का शिकार हो चुकी हैं। इसी के तहत, सांसद महुआ मोइत्रा पर हाल ही में अंडे और आलू फेंके गए। इस घटना के खिलाफ उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां अदालत ने बंगाल पुलिस से कड़े सवाल पूछे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर एक सांसद पर ऐसे हमले हो रहे हैं, तो आम लोगों की सुरक्षा का क्या होगा।
कोर्ट का सुरक्षा निर्देश
कलकत्ता हाई कोर्ट ने मंगलवार को निर्देश दिया कि जब टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा अपने निर्वाचन क्षेत्र में जाएं, तो उनके साथ दो पुलिसकर्मी तैनात रहें। यह सुरक्षा व्यवस्था अगले एक महीने के लिए लागू करने को कहा गया है। लाइव लॉ के अनुसार, महुआ मोइत्रा की ओर से पेश हुए सीनियर वकील कल्याण बंदोपाध्याय ने अदालत को बताया कि सांसद अपनी पार्लियामेंट्री ड्यूटी पूरी नहीं कर पा रही हैं, क्योंकि उन्हें अपने क्षेत्र में जाने से रोका जा रहा है।
पुलिस से संबंधित घटनाएं
बंदोपाध्याय ने कोर्ट में एक घटना का उल्लेख किया, जिसमें मोइत्रा के सर्किट हाउस में रहने के दौरान रात करीब साढ़े दस बजे अलॉटमेंट को कैंसल कर दिया गया। उस समय भाजपा कार्यकर्ता वहां मौजूद थे और कोई पुलिस भी नहीं थी। वकील ने पूछा, 'क्या हम ऐसे बिना नियंत्रण के हालात में रहेंगे? जब तक मैं सांसद हूं, मैं अपनी ड्यूटी निभाऊंगा।' उन्होंने यह भी बताया कि मोइत्रा ने पुलिस अधिकारियों को जानकारी दी थी, लेकिन जवाब में तीन घंटे का समय लगा।
राजनीतिक सुरक्षा पर सवाल
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर किसी सांसद को चुनाव क्षेत्र में अंडे फेंके जाते हैं, तो अन्य राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा का क्या होगा जो विरोधी पार्टियों से जुड़े हैं? महुआ मोइत्रा के वकील ने सुरक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया, यह बताते हुए कि बिना सुरक्षा के सांसद अपने क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से नहीं घूम पाएंगी। राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि मोइत्रा को पहले से ही सुरक्षा मिली हुई है, लेकिन कोर्ट ने निर्देश दिया कि जब भी वह अपने क्षेत्र में जाएं, तो बंगाल पुलिस के दो पुलिसकर्मी उनकी सुरक्षा में रहेंगे।





