गायकवाड़ का विवादित बयान
महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या को लेकर शिवसेना विधायक संजय गायकवाड़ का बयान विवाद का विषय बन गया है। बुलढाणा से विधायक गायकवाड़ ने कहा कि आत्महत्या करने वाले किसानों के अंतिम संस्कार में किसी को शामिल नहीं होना चाहिए, ताकि उनकी आत्मा को शांति न मिले। उन्होंने यह भी कहा कि जब जानवर उनके शवों को खाएंगे, तब उन्हें वास्तविकता का एहसास होगा और वे आत्महत्या करने से रुकेंगे।
किसान संगठनों की प्रतिक्रिया
गायकवाड़ का यह बयान सुनकर किसान संगठनों के नेताओं ने तीखी आलोचना की है। शिवसेना के प्रवक्ता संजय निरुपम ने कहा कि जनप्रतिनिधियों और नेताओं को किसानों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। उनका यह बयान किसानों के प्रति अपमानजनक और असंवेदनशील है।
किसानों की आत्महत्या की गंभीरता
महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या की समस्या एक बार फिर चर्चा में है, विशेषकर सूखे और फसल बर्बादी के कारण। राज्य में पिछले कुछ वर्षों से भारी सूखे से फसलें खराब हो रही हैं, जिसके कारण किसान आर्थिक तंगी के शिकार हो रहे हैं। गायकवाड़ ने कहा कि अगर किसानों को कोई परेशानी है, तो उन्हें आत्महत्या करने के बजाय सरकार या जनप्रतिनिधियों को पत्र लिखना चाहिए।
गायकवाड़ के पूर्व के विवाद
संजय गायकवाड़ पहले भी अपने विवादित बयानों के लिए चर्चा में रह चुके हैं। उन्होंने कैंटीन के एक कर्मचारी को बासी खाना परोसने पर मुक्का मारा था। इसके अलावा, उन्होंने विवादास्पद टिप्पणियों के चलते शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे से भी फटकार खाई है। गायकवाड़ के विवादित बयान उनके पिछले विवादों की एक कड़ी में शामिल हैं।
किसान नेताओं की आलोचना
गायकवाड़ के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए किसान सभा के नेता अजीत नवले ने कहा कि जब तक ऐसे लोग चुने जाते रहेंगे, तब तक राज्य प्रगति नहीं कर सकता। उन्होंने गायकवाड़ के चुनाव में समर्थन देने वालों को उनके फैसले पर पछताने की सलाह दी। स्वाभिमानी पक्ष के किसान नेता राजू शेट्टी ने भी कहा कि गायकवाड़ का बयान उन लोगों के लिए उदाहरण है जिनके पास कोई मानक नहीं हैं।
किसानों की आत्महत्या के आंकड़े
महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या के आंकड़े गंभीर स्थिति की ओर इशारा करते हैं। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2022 से जून 2026 के बीच हर दिन औसतन आठ से अधिक किसानों ने आत्महत्या की। राज्य सरकार के राहत और पुनर्वास विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 54 महीनों में कुल 13,128 किसानों ने आत्महत्या की है।





