कांग्रेस और सपा के बीच सीट बंटवारे की तकरार
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के नजदीक आते ही कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीट बंटवारे को लेकर तनाव बढ़ता हुआ नजर आ रहा है। कांग्रेस अब केवल सपा के छोटे सहयोगी के रूप में नहीं रहना चाहती, बल्कि उसने 403 विधानसभा सीटों में से 200 सीटें मांगने का निर्णय लिया है।
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस कई सीटें उन छोटी पार्टियों को देने की योजना बना रही है जो उसके साथ गठबंधन में आ सकती हैं। पार्टी का उद्देश्य उत्तर प्रदेश में विभिन्न सामाजिक समूहों को एकत्रित करके ऐसा गठबंधन तैयार करना है, जैसा कि बीजेपी ने पिछले विधानसभा चुनावों में किया था।
बीजेपी की रणनीति से सीख रही कांग्रेस
उत्तर प्रदेश में बीजेपी की 2017 और 2022 की चुनावी सफलता में छोटी पार्टियों के साथ गठबंधन की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। इनमें गैर-यादव ओबीसी और दलित वर्ग से संबंधित पार्टियां शामिल थीं। बीजेपी ने पिछले चुनाव में निषाद पार्टी, अपना दल (सोनेलाल) और अन्य छोटी पार्टियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। 2022 में बीजेपी ने 255 सीटें जीती थीं, जो 2017 की 312 सीटों से कम थी, फिर भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत प्राप्त हुआ।
कांग्रेस अब इस रणनीति से सीख लेते हुए छोटे दलों को अपने साथ जोड़ने का प्रयास कर रही है।
स्वामी प्रसाद मौर्य और निषाद पार्टी के संपर्क
सूत्रों के अनुसार, स्वामी प्रसाद मौर्य का गुट और निषाद पार्टी कांग्रेस के संपर्क में हैं। शनिवार को मौर्य ने दिल्ली में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात की। इस बातचीत के बाद उनकी कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं।
मौर्य ने 2022 के विधानसभा चुनाव से पूर्व बीजेपी छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थामा था, लेकिन फाजिलनगर सीट से चुनाव हार गए थे। निषाद पार्टी ने भी पिछले चुनाव में बीजेपी के साथ गठबंधन किया था और 6 सीटें हासिल की थीं। अब कांग्रेस इन दलों को अपने साथ लाने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस की नई भूमिका पर जोर
कांग्रेस के भीतर यह महसूस किया जा रहा है कि पार्टी को उत्तर प्रदेश में लंबे समय से चल रही ‘छोटे भाई’ वाली भूमिका से बाहर निकलना चाहिए। पार्टी के कई नेता मानते हैं कि लोकसभा चुनाव और वोट चोरी जैसे मुद्दों पर कांग्रेस को बीजेपी के विरुद्ध सीधे मोर्चा लेना चाहिए।
कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम सीट बंटवारे को जल्द ही अंतिम रूप देने की आवश्यकता पर बल दे रहे हैं। वहीं, समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने कांग्रेस नेताओं के बयानों का जवाब देते हुए जमीनी स्थिति और संगठन की ताकत का जिक्र किया है। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस आने वाले समय में सीट बंटवारे के लिए एक समिति बनाने की योजना बना सकती है, जिसमें सीनियर नेताओं को शामिल किया जाएगा।





