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राष्ट्रीय • दिल्ली

कांग्रेस ने दवा की कीमतों पर केंद्र को घेरा, सवाल उठाए

कांग्रेस ने महंगी दवाओं की उपलब्धता पर केंद्र सरकार से सवाल किए हैं।

कांग्रेस ने दवा की कीमतों पर केंद्र को घेरा, सवाल उठाए
फोटो: Congress Criticizes Center Over Drug Prices, Raises Questions

कांग्रेस का केंद्र पर हमला

कांग्रेस ने गंभीर बीमारियों की दवाओं की कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि सरकार की जनविरोधी नीतियों के कारण देशभर में मरीजों पर महंगी दवाओं का बोझ बढ़ रहा है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए 'झोला उठाने का समय जल्दी आ रहा है'।


उन्होंने यह भी सवाल किया कि जब कानून मरीजों को राहत प्रदान करने का मार्ग प्रशस्त करता है, तो सरकार उस पर आगे बढ़ने में देरी क्यों कर रही है। रमेश ने कहा कि सस्ती दवाओं की उपलब्धता कब सुनिश्चित की जाएगी।


दवाओं की कीमतों पर गंभीर आरोप

रमेश ने अपने 'एक्स' पोस्ट में कहा, ''मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियों के कारण मरीजों पर महंगी दवाओं का बोझ बढ़ गया है, जबकि प्रधानमंत्री अपनी अलग ही धुन में व्यस्त हैं।'' उन्होंने यह भी बताया कि दवाओं और स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर मरीजों से भारी कीमत वसूली जा रही है।


उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 74 रुपये की एक इंजेक्शन की कीमत 4,980 रुपये हो गई है और उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मरीजों से 67 गुना अधिक वसूली की जा रही है।


कैंसर के इलाज पर उच्च खर्च

रमेश ने कैंसर जैसी गंभीर बिमारी के उपचार को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि एक दवा की 21 दिन की खुराक की कीमत लगभग 58,000 रुपये है, जिससे सालाना खर्च करीब 10 लाख रुपये तक पहुंच जाता है।


उन्होंने कहा कि यह केवल एक दवा की कीमत का मामला नहीं है, बल्कि यह पिछले 12 वर्षों से सत्ता में बैठी सरकार की नीतियों की प्राथमिकताओं का भी प्रश्न है।


कानूनी प्रावधानों का हवाला

कांग्रेस महासचिव ने पेटेंट कानून की धाराओं 92 और 100 का उल्लेख करते हुए कहा कि इनमें सार्वजनिक हित और सरकारी उपयोग के लिए प्रावधान मौजूद हैं। उन्होंने केरल उच्च न्यायालय के एक निर्णय का भी जिक्र किया, जिसमें कहा गया है कि पेटेंट अधिनियम की धारा 100 के तहत सरकार जीवनरक्षक दवाओं का उत्पादन कर सकती है।


रमेश ने प्रश्न उठाया कि जब कानून में ऐसे प्रावधान हैं और उच्च न्यायालय ने भी स्पष्टता प्रदान की है, तो फिर जीवनरक्षक दवाएं मरीजों की पहुंच से बाहर क्यों हैं। उन्होंने कहा, ''प्रधानमंत्री जी, मरीजों के लिए सस्ती दवा कब सुनिश्चित होगी?''