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राष्ट्रीय • दिल्ली

अंकिता भंडारी केस: "आरोपी को सम्मानित कर जख्मों पर छिड़का नमक", इमरान प्रतापगढ़ी का केंद्र सरकार पर तीखा हमला

अंकिता भंडारी हत्याकांड: इंडिया गेट पर धरने पर बैठे माता-पिता के समर्थन में आए इमरान प्रतापगढ़ी, सरकार को घेरा।

अंकिता भंडारी केस: "आरोपी को सम्मानित कर जख्मों पर छिड़का नमक", इमरान प्रतापगढ़ी का केंद्र सरकार पर तीखा हमला
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नई दिल्ली: उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड (2022) में न्याय की मांग को लेकर अंकिता के माता-पिता का दिल्ली स्थित इंडिया गेट पर मध्य रात्रि में धरना जारी है। इस दौरान कांग्रेस सांसद और प्रमुख युवा नेता इमरान प्रतापगढ़ी ने प्रदर्शन स्थल पर पहुँचकर परिवार का समर्थन किया और केंद्र सरकार की नीति और नीयत पर गंभीर सवाल उठाए।

'जख्मों पर मरहम लगाने के बजाय नमक रगड़ा'

इमरान प्रतापगढ़ी ने अंकिता के माता-पिता की स्थिति पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि एक तरफ उत्तराखंड की बेटी का परिवार पिछले चार वर्षों से इंसाफ के लिए दर-दर भटक रहा है, वहीं दूसरी तरफ सरकार ने मामले में नामजद संदिग्ध को सम्मानित कर दिया है।

उन्होंने कहा:

"सामने राष्ट्रपति भवन, पास में संसद भवन और प्रधानमंत्री आवास है, लेकिन देश के हृदय स्थल पर एक लाचार मां-बाप आंखों में आंसू लिए बैठे हैं। सरकार ने पीड़िता के घावों पर मरहम लगाने के बजाय नमक रगड़ने का काम किया है। आरोपी वीआईपी को राज्यपाल (वीवीआईपी) बनाकर संरक्षित किया जा रहा है ताकि वह जांच के दायरे से बाहर रहे।"

'बेटी बचाओ' नारे की असलियत उजागर

हाथरस, कठुआ और बिल्किस बानो मामलों का हवाला देते हुए सांसद ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार का 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' का नारा पूरी तरह खोखला साबित हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब-जब महिलाओं और बेटियों के खिलाफ अपराध होते हैं, तब-तब सत्ताधारी दल के लोग आरोपियों और दोषियों के पक्ष में खड़े दिखाई देते हैं।

उन्होंने जनता से अपील की कि अंकिता भंडारी केवल उत्तराखंड की नहीं, बल्कि पूरे देश की बेटी है। इसलिए हर नागरिक को सोशल मीडिया, चौराहों और आंदोलनों के जरिए इस परिवार के इंसाफ की आवाज बनना चाहिए।

'जंतर-मंतर रोकने से नहीं रुकेगा जनाक्रोश'

दिल्ली प्रशासन द्वारा जंतर-मंतर को प्रदर्शनों के लिए प्रतिबंधित करने पर उन्होंने चेतावनी दी कि लाठी और पुलिसिया दमन के जोर पर जनता के आक्रोश को दबाया नहीं जा सकता। यदि एक जगह बंद की जाएगी, तो देश का हर चौराहा जंतर-मंतर में तब्दील हो जाएगा। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में घटी यह अमानवीय घटना और उसके बाद आरोपियों को बचाने के प्रयास दिखाते हैं कि सरकार की संवेदना पूरी तरह खत्म हो चुकी है।

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