हमें मिलकर बैठना चाहिए और आगे का रास्ता तय करना चाहिए। लेकिन अब तक हम एक भी बैठक नहीं कर पाए हैं।" उनके अनुसार, गठबंधन में बनी इस खामोशी से यह सवाल उठने लगे हैं कि कहीं गठबंधन टूटने की ओर तो नहीं बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अब तक कोई संवाद और समन्वय नहीं है, जिससे लोगों में शंका पैदा हो रही है और यह गठबंधन के अस्तित्व पर भी सवाल उठा रहा है। राउत ने यह चेतावनी भी दी कि अगर गठबंधन टूटता है तो शायद भविष्य में फिर कभी एकजुट नहीं हो पाएगा।
इससे पहले, जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी इसी मुद्दे पर अपनी चिंता जाहिर की थी। उन्होंने कहा कि दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद गठबंधन के सभी सदस्य दलों की बैठक होनी चाहिए।
अगर यह गठबंधन सिर्फ लोकसभा चुनावों तक सीमित था, तो उसे समाप्त कर दिया जाना चाहिए, लेकिन यदि यह गठबंधन विधानसभा चुनावों के लिए भी था, तो सभी को मिलकर एकजुट होकर काम करना होगा।
उमर अब्दुल्ला ने राजद नेता के उस बयान का भी जवाब दिया था, जिसमें कहा गया था कि विपक्षी गठबंधन का अस्तित्व केवल लोकसभा चुनाव तक था। उन्होंने कहा, "मुझे याद नहीं आता कि इस गठबंधन के लिए कोई समयसीमा निर्धारित की गई हो।
असल मुद्दा यह है कि INDIA गठबंधन की अब तक कोई बैठक नहीं हुई है।" उमर अब्दुल्ला ने यह भी आरोप लगाया कि इस गठबंधन के प्रमुख नेतृत्व और भविष्य की रणनीति के बारे में कोई स्पष्टता नहीं है। उन्होंने साफ किया कि यह भी स्पष्ट नहीं है कि यह गठबंधन आगे भी जारी रहेगा या नहीं।
इसके साथ ही उमर अब्दुल्ला ने यह भी कहा कि अगर अब इस गठबंधन का कोई मतलब नहीं है, तो उसे खत्म कर देना चाहिए ताकि सभी दल स्वतंत्र रूप से अपनी रणनीतियां बना सकें। उन्होंने यह भी जोड़ा कि वर्तमान में कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं, जिससे गठबंधन के सदस्यों में निराशा और अविश्वास की स्थिति पैदा हो सकती है।
कांग्रेस पर लगातार हो रही इस आलोचना के बाद, अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या कांग्रेस अपनी नेतृत्व की भूमिका को लेकर पूरी तरह जिम्मेदार और सक्रिय है, और क्या वह इस गठबंधन को सही दिशा में ले जा रही है या नहीं। अगर यह स्थिति बनी रही तो विपक्षी दलों में और भी अधिक मतभेद सामने आ सकते हैं, जो आगामी चुनावों में गठबंधन के एकजुट रहने को मुश्किल बना सकते हैं।
कुल मिलाकर, INDIA गठबंधन के सदस्य दलों के बीच बढ़ती हुई अनबन और असमंजस की स्थिति इस गठबंधन के भविष्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। अब देखना यह होगा कि क्या कांग्रेस इस स्थिति को संभालने में सक्षम होती है, या फिर गठबंधन के टूटने से विपक्षी एकता पर बड़ा असर पड़ेगा।





