पदयात्रा का आरंभ
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की कर्नाटक इकाई ने राज्य की डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के खिलाफ 10 दिनों की पदयात्रा का आरंभ किया है। यह यात्रा आज, यानी 1 सितंबर, 2026 को रायचूर जिले के लिंगसुगुर से प्रारंभ हुई है और यह कुल 175 किलोमीटर की दूरी तय करेगी, जो 10 सितंबर को बल्लारी में समाप्त होगी। भाजपा इसे 2028 के कर्नाटक विधानसभा चुनावों से पहले सत्ताधारी कांग्रेस के खिलाफ एक व्यापक अभियान के पहले चरण के रूप में देख रही है। भाजपा के सहयोगी दल जनता दल (सेक्युलर) ने इस पदयात्रा को प्रतीकात्मक समर्थन प्रदान किया है।
राजनीतिक दबाव का उद्देश्य
इस पदयात्रा का उद्देश्य मार्च में शिवकुमार सरकार पर दबाव बनाना था, ताकि बी. नागेंद्र को महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम घोटाले में उनकी कथित संलिप्तता के चलते कैबिनेट से हटाया जा सके। हालांकि, बी. नागेंद्र के इस्तीफे के बाद भाजपा ने इस अभियान का दायरा और भी बढ़ा दिया है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने स्पष्ट किया है कि इस पदयात्रा के दौरान कई मुद्दे उठाए जाएंगे, जिनका राज्य सरकार से सीधा संबंध है।
भाजपा की नई रणनीति
भाजपा की नई रणनीति के अनुसार, पार्टी वाल्मीकि निगम मामले में कथित गबन के 187 करोड़ रुपये की वसूली की मांग करेगी। इसके साथ ही, एससी/एसटी समुदायों के विकास के लिए बने एससीएसपी/टीएसपी फंड के 'पांच गारंटियों' को पूरा करने के लिए उपयोग में लाने के आरोप भी लगाए जाएंगे। इसके अलावा, गृह लक्ष्मी योजना के तहत 5,000 करोड़ रुपये के मामले में जवाबदेही की कमी, सूखे से निपटने के उपायों और पशु चिकित्सा डॉक्टरों की भर्ती में अनियमितताओं पर भी सवाल उठाए जा सकते हैं।
डीके शिवकुमार के लिए संकट
भाजपा के सूत्रों के अनुसार, पार्टी इस आंदोलन को नागेंद्र या नायक समुदाय तक सीमित नहीं रखना चाहती, क्योंकि यह राजनीतिक दृष्टि से नुकसानदेह हो सकता है। भाजपा इसे एसटी समुदाय के कल्याण के लिए बने फंड के कथित दुरुपयोग के मुद्दे के रूप में पेश करना चाहती है। पूर्व मंत्री और एसटी नायक समुदाय के प्रमुख नेता बी. श्रीरामुलु भी नागेंद्र और कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोलने की योजना बना रहे हैं। यदि भाजपा की यह मुहिम सफल होती है, तो यह मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के लिए एक गंभीर चुनौती बन सकती है।





