खालिस्तानी गतिविधियों में उबाल
PM Narendra Modi अगले दिनों में पंजाब के दौरे पर जा रहे हैं। इससे पहले खालिस्तानी तत्व सक्रिय होते नज़र आ रहे हैं। हाल ही में एक वीडियो सामने आया है, जिसमें दिल्ली जा रही एक ट्रेन पर खालिस्तान समर्थक नारे लिखे हुए दिखाई दे रहे हैं। यह दृश्य फिरोज कैंट रेलवे स्टेशन का है। यह वीडियो अलगाववादी समूह 'सिख्स फॉर जस्टिस' (SFJ) द्वारा साझा किया गया था। हालांकि, लाइव हिन्दुस्तान इस वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस वीडियो को एसएफजे के संस्थापक गुरपतवंत सिंह पन्नू ने साझा किया, जिसमें उन्होंने मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा का उल्लेख किया। खालड़ा हाल ही में रिलीज हुई फिल्म 'सतलुज' के कारण चर्चा में हैं। पन्नू ने वीडियो में PM Narendra Modi कि यात्रा के दौरान खालिस्तानी झंडे प्रदर्शित करने की भी अपील की।
वीडियो में किए गए दावे
वीडियो में पन्नू का कहना है कि खालड़ा ने 1990 के दशक में अज्ञात शवों से संबंधित मामलों के दस्तावेज तैयार किए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि ये दस्तावेज मानवाधिकार उल्लंघन की प्रवृत्तियों को दर्शाते हैं।
इस बीच, अधिकारियों ने फिरोजपुर कैंट रेलवे स्टेशन पर सीसीटीवी फुटेज की जांच शुरू कर दी है ताकि ट्रेन पर नारे लिखने वालों की पहचान की जा सके। पुलिस मौके से फॉरेंसिक सबूत भी इकट्ठा कर रही है। PM Narendra Modi के दौरे की तैयारियों के चलते पुलिस सुरक्षा को लेकर अलर्ट मोड में है।
पीएम मोदी का संभावित दौरा
सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी 15 से 17 जुलाई के बीच पंजाब का दौरा कर सकते हैं। इस दौरान उनकी लुधियाना और जालंधर में विभिन्न कार्यक्रमों में शिरकत करने की योजना है, जिसमें जालंधर कैंट स्टेशन का उद्घाटन भी शामिल है। इसके अतिरिक्त, चंडीगढ़ में कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करने की संभावना है।
सतलुज फिल्म पर केंद्रीय मंत्री की टिप्पणी
केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने रविवार को कहा कि दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' के निर्माता 'विवादित दावों को स्थापित इतिहास' के रूप में पेश करने में 'रचनात्मक स्वतंत्रता' का गलत उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब का दर्दनाक अतीत कोई ऐसी कहानी नहीं है जिसे किसी विमर्श के अनुसार संपादित किया जा सके।
बिट्टू ने फिल्म के निर्माताओं को चुनौती दी कि वे पंजाब के लोगों के सामने सभी दस्तावेज, सरकारी रिकॉर्ड, न्यायिक निष्कर्ष और प्रमाणित डेटा प्रस्तुत करें, जो कि 25,000 लोगों के लापता होने या गैर-कानूनी अंतिम संस्कार के मामले को स्थापित करते हों, जैसा कि फिल्म में दिखाया गया है।
फिल्म का विवाद और उसकी पृष्ठभूमि
फिल्म 'सतलुज', जो मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है, ने 1984 से 1994 के बीच पंजाब में हजारों 'अज्ञात' शवों के 'गैर-कानूनी अंतिम संस्कार' की जांच की थी। यह फिल्म तीन जुलाई को रिलीज होने के दो दिन बाद ही भारत में ओटीटी प्लेटफॉर्म 'जी 5' से हटा दी गई, क्योंकि सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने सुरक्षा संबंधी चिंताओं को ध्यान में रखा।
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