AAP कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन और FIR
दिल्ली के बंगला साहिब गुरुद्वारे के पास प्रदर्शन करने के आरोप में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और अन्य आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी (DSGMC) ने गुरुद्वारे की शांति भंग करने और भ्रामक वीडियो एवं सोशल मीडिया पोस्ट साझा करने के संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली और मामले की जांच के लिए वीडियो फुटेज का सहारा लिया जा रहा है।
डीएसजीएमसी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने एक दिन पहले पत्रकारों से कहा था कि सिख समुदाय में असंतोष है। आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने गुरुद्वारे के पास प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी की थी। कालका ने स्पष्ट किया कि कमेटी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करेगी और कहा कि कुछ प्रदर्शनकारी गुरुद्वारे के अंदर घुस आए थे, जहां उन्होंने पोस्टर लहराए और नारेबाजी की, जो किसी धार्मिक स्थल की पवित्रता का उल्लंघन है।
प्रदर्शन की पवित्रता पर उठे सवाल
हरमीत सिंह कालका ने कहा कि अतीत में भी कुछ प्रदर्शनकारी गुरुद्वारे के भीतर आए थे, लेकिन वे शांतिपूर्ण तरीके से थे। उन्होंने कहा, "जैसे ही 50 लोग इकट्ठा होते हैं, नारेबाजी शुरू कर दी जाती है। यह सिख समुदाय और गुरुद्वारे की गरिमा के खिलाफ है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।" उन्होंने यह भी बताया कि यह सब आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने किया और यह उनके नेता अरविंद केजरीवाल के निर्देश पर हो रहा था।
गुरुद्वारे में पुलिस के प्रवेश पर भी आपत्ति जताई गई है। कालका ने दिल्ली पुलिस के उपायुक्त से आग्रह किया कि वे सुनिश्चित करें कि पुलिसकर्मी किसी भी परिस्थिति में गुरुद्वारे में प्रवेश न करें। उनके अनुसार, आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए उपद्रव को लेकर केजरीवाल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है।
राजनीतिक नारेबाजी की आलोचना
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने भी इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने गुरुद्वारा बंगला साहिब के परिसर में राजनीतिक नारेबाजी और प्रदर्शन के लिए राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग से कार्रवाई की मांग की है।
सिंह ने आयोग के अध्यक्ष सरदार हरजीत सिंह ग्रेवाल को लिखे पत्र में इस मामले में त्वरित हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी के समर्थकों और वामपंथी छात्र संगठनों के सदस्यों ने एक महत्वपूर्ण सिख तीर्थ स्थल का राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया है, जिससे गुरुद्वारे की पवित्रता और श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है।





