हेलीकॉप्टरों की खरीद का निर्णय
भारतीय वायुसेना ने देश के VVIP नागरिकों, जिनमें राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री शामिल हैं, के लिए 24 विशेष हेलीकॉप्टर खरीदने की योजना बनाई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग 10,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सोमवार को आयोजित रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक में इस खरीद को आधिकारिक स्वीकृति प्रदान की गई। रक्षा मंत्रालय ने इस संबंध में एक बयान जारी कर जानकारी दी।
मंत्रालय के बयान के अनुसार, इन हेलीकॉप्टरों की खरीद से वायुसेना की महत्वपूर्ण हवाई परिवहन आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता मिलेगी।
निर्माताओं का चयन
इस परियोजना के तहत यूरोपीय कंपनी एयरबस के एच-725 हेलीकॉप्टर और अमेरिका की लॉकहीड मार्टिन कंपनी के हेलीकॉप्टरों को संभावित दावेदार माना जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि वीवीआईपी लोगों की विशेष आवश्यकताओं के अनुसार इन हेलीकॉप्टरों की तकनीकी विशेषताएं निर्धारित की गई हैं। इनका मुख्य उद्देश्य देश के शीर्ष संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों को सुरक्षित हवाई परिवहन प्रदान करना होगा।
जैसे-जैसे खरीद प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, हेलीकॉप्टरों के चयन की दिशा स्पष्ट होगी।
पुराने हेलीकॉप्टरों का स्थान
इन नए हेलीकॉप्टरों की खरीद का एक प्रमुख उद्देश्य वायुसेना के मौजूदा MI-17 V5 हेलीकॉप्टरों के स्थान पर आधुनिक विकल्प लाना है। वर्तमान में, इन हेलीकॉप्टरों का उपयोग राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के हवाई यात्रा के लिए किया जा रहा है। पहले, वीवीआईपी परिवहन के लिए MI-17 V5 में कुछ आवश्यक बदलाव किए गए थे, लेकिन अब सरकार विशिष्ट रूप से तैयार हेलीकॉप्टर खरीदने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ये नए हेलीकॉप्टर वायुसेना की आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक होंगे।
पिछले विवादों का संदर्भ
वीवीआईपी हेलीकॉप्टरों की खरीद का मुद्दा पूर्व में भी विवादों से घिरा रहा है। इससे पहले, VVIP हेलीकॉप्टर खरीदने की एक योजना को घोटाले के आरोपों के कारण रद्द कर दिया गया था। उसके बाद, MI-17 V5 हेलीकॉप्टरों में सुधार करके उनका उपयोग वीवीआईपी परिवहन के लिए किया जाने लगा। अब 24 नए हेलीकॉप्टरों की खरीद की योजना इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है।
यह परियोजना 10,000 करोड़ रुपये की लागत से ऐसे हेलीकॉप्टरों पर केंद्रित है, जो देश के शीर्ष नेताओं की हवाई परिवहन की विशेष आवश्यकताओं को पूरा कर सकें।





