सुनवाई के दौरान, वकील ने अपनी दलील प्रस्तुत करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की। इस पर जस्टिस रॉय ने मजाकिया लहजे में कहा, "ठीक है, हम आपको 30 सेकंड देते हैं, लेकिन आपकी याचिका खारिज कर रहे हैं।" याचिका को औपचारिक रूप से खारिज करने के बाद उन्होंने वकील से अनुरोध किया, "अब अपने मामले के अलावा कुछ और बोलिए। क्रिकेट पर बात क्यों न करें? आखिर ऑस्ट्रेलिया में हमारी टीम के साथ क्या गलत हुआ?"
वकील असमंजस में, कोर्ट में छाई हल्की-फुल्की बातचीत
जस्टिस रॉय की अप्रत्याशित टिप्पणी से वकील थोड़ा असमंजस में पड़ गए। कानूनी दलीलों के बजाय खेल पर चर्चा करने का यह अवसर उन्होंने नहीं लिया। जस्टिस रॉय ने यह स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य गंभीर सुनवाई के बीच थोड़ा आरामदायक माहौल बनाना था। उनकी यह हास्यपूर्ण शैली कोर्ट में दिनभर की गंभीरता के बीच सकारात्मकता लाने की कोशिश का हिस्सा थी। पीठ में शामिल जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी ने निचली अदालतों के फैसलों को स्थिरता प्रदान करते हुए हस्तक्षेप न करने के कारणों को स्पष्ट किया। हालांकि, इस सुनवाई की चर्चा जस्टिस रॉय की अनूठी शैली के कारण हुई।
यह घटना जस्टिस रॉय की न्यायिक शैली और हास्यपूर्ण दृष्टिकोण को उजागर करती है। उनकी यह विशेषता उन्हें उनके सहकर्मियों और अधिवक्ताओं के बीच प्रिय बनाती है। पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ भी उनकी इस क्षमता की सराहना करते थे। 31 जनवरी को सेवानिवृत्त होने जा रहे जस्टिस रॉय ने इस अनोखी घटना से अपने न्यायिक करियर में एक और यादगार पल जोड़ दिया। उनकी यह विरासत अदालतों में न्याय और सौहार्द का संतुलन बनाए रखने की मिसाल है।
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