देश की राजनीति में उस समय भूचाल आ गया जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग (Election Commission of India - ECI) और दिग्गज तकनीकी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की भूमिका पर बेहद गंभीर सवाल खड़े किए। राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि नए मतदाता पंजीकरण (Voter Registration) के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ऑनलाइन 'फॉर्म 6' (Form 6) में गैर-कानूनी या अवैध तरीके से बदलाव किए गए थे।
यह पूरा विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब देश में चुनावी अनियमितताओं, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR - Special Intensive Revision) और दलितों, आदिवासियों व अल्पसंख्यकों के नाम मतदाता सूची से कथित तौर पर हटाने को लेकर सियासत गरमाई हुई है। इस पूरे घटनाक्रम के मुख्य और विस्तृत पहलू निम्नलिखित हैं:
1. राहुल गांधी के तीखे सवाल और ECI-TCS पर आरोप
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए राहुल गांधी ने इस पूरे मामले पर सीधा प्रहार किया। उन्होंने चुनाव आयोग के अंदरूनी मामलों और टेक पार्टनर TCS की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मुख्य रूप से तीन बड़े बिंदु उठाए:
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अवैध बदलाव का दावा: राहुल गांधी ने कहा कि चुनाव आयोग के अपने आयुक्तों (Commissioners) ने खुद रिकॉर्ड में यह दर्ज किया है कि ऑनलाइन फॉर्म 6 में अवैध रूप से फेरबदल किया गया था।
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पहला सवाल: उन्होंने पूछा कि आखिर चुनाव आयोग में ऐसा कौन था, जिसने TCS को फॉर्म 6 में यह अवैध बदलाव करने का आदेश दिया था?
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दूसरा सवाल: TCS की ओर से इस बदलाव पर किसने हस्ताक्षर (Sign off) किए और क्या इस तकनीकी कंपनी या उसके अधिकारियों पर ऐसा करने के लिए कोई दबाव डाला गया था?
2. विपक्ष ('इंडिया' गठबंधन) की रणनीति और बड़े कदम
इस खुलासे और SIR प्रक्रिया पर चल रहे विवाद के बाद, विपक्षी दलों के 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन ने सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ अपने आंदोलन को और तेज कर दिया है। हाल ही में 19 विपक्षी दलों की एक लंबी (साढ़े तीन घंटे से अधिक चली) बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए:
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संसद से सड़क तक प्रदर्शन: विपक्षी गठबंधन ने देश के सभी जिलों में संयुक्त रूप से 'लोकतंत्र बचाओ' मार्च निकालने और पूरे देश में पांच बड़ी रैलियां आयोजित करने का ऐलान किया है।
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चुनाव आयोग और राष्ट्रपति तक मार्च: गठबंधन के सभी सांसद आगामी 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग कार्यालय तक मार्च निकालेंगे। इसके अलावा, विपक्षी नेता राष्ट्रपति से मिलकर मतदाता सूची संशोधन में कथित अनियमितताओं की शिकायत करेंगे।
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मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के इस्तीफे की मांग: विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर पूरी तरह अड़ा हुआ है और साफ कर दिया है कि जब तक उन्हें पद से हटाया नहीं जाता, तब तक उनका विरोध थमेगा नहीं।
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बैलेट पेपर की मांग: विपक्षी दलों ने यह भी मांग उठाई है कि भविष्य के सभी चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की जगह बैलेट पेपर (मतपत्र) के जरिए होने चाहिए, साथ ही सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया गया है कि वह SIR और चुनावी गड़बड़ियों से जुड़े मामलों की सुनवाई में तेजी लाए।
3. चुनाव आयोग (ECI) की प्रतिक्रिया और बचाव
चुनाव आयोग पर यह हमला ऐसे समय में तेज हुआ है जब कुछ दिन पहले मीडिया रिपोर्ट्स में यह खुलासा हुआ था कि चुनाव आयुक्तों (संधु और जोशी) ने पिछले 10 महीनों में एसआईआर (SIR) प्रक्रिया से जुड़े फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित रूप से अपनी आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि ये आदेश उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना जारी किए गए थे।
इन तमाम आलोचनाओं और आंतरिक असंतोष के जवाब में चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि:
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किसी भी संस्थागत विचार-विमर्श या बैठकों में अलग-अलग विचार, मतभेद और टिप्पणियां होना एक सामान्य प्रक्रिया है।
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आयोग द्वारा जारी किए गए सभी आदेश पूरी तरह से कानूनी रूप से वैध (Full legal sanction) हैं और स्थापित वैधानिक प्रक्रियाओं (Statutory procedures) का पूरी तरह से पालन करके बनाए गए हैं।
निष्कर्ष
फॉर्म 6 में कथित बदलाव के इस नए आरोप और चुनाव आयोग के आंतरिक मतभेदों ने राजनीतिक सरगर्मी को चरम पर पहुंचा दिया है। आने वाले दिनों में विपक्ष का 'लोकतंत्र बचाओ' मार्च और संसद से लेकर सड़क तक का यह संघर्ष चुनावी राजनीति का मुख्य केंद्र बनने वाला है।





