कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत डिपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क से राष्ट्रव्यापी 'जेल भरो आंदोलन' की शुरुआत कर दी है। हालांकि, इस विरोध प्रदर्शन का तात्कालिक कारण चुनाव आयोग के भीतर आंतरिक कलह को उजागर करने वाली एक मीडिया जांच रिपोर्ट थी, लेकिन मुंबई और गांधी जयंती के दिन को चुनने के पीछे एक गहरी राजनीतिक रणनीति और राहुल गांधी का कनेक्शन है।
गुरुवार को मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अभिजीत डिपके ने इस बात का खुलासा किया। उन्होंने सवाल उठाया कि 2024 के लोकसभा चुनावों में महाराष्ट्र में बीजेपी को केवल 9 सीटें मिली थीं, लेकिन महज छह महीने बाद हुए विधानसभा चुनावों में पूरा परिदृश्य कैसे बदल गया? इसी चौंकाने वाले बदलाव के संदर्भ में CJP ने इस आंदोलन की शुरुआत के लिए मुंबई को चुना है।
उन्होंने मराठी की प्रसिद्ध कहावत—"दिल्लीचे ही तख्त राखतो महाराष्ट्र माझा"—का हवाला देते हुए कहा कि महाराष्ट्र से ही देश की राजनीति की दिशा तय होती है। आपको बता दें कि 2024 के लोकसभा चुनावों में महायुति को केवल 17 सीटें मिली थीं, जबकि महाविकास अघाड़ी (MVA) ने 30 सीटों पर कब्जा जमाया था। इसके ठीक विपरीत, विधानसभा चुनावों में महायुति ने 230 सीटें जीतकर ऐतिहासिक वापसी की। इन नतीजों के तुरंत बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग (ECI) पर 'वोट चोरी' का गंभीर आरोप लगाया था और महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र के आंकड़ों का विशेष रूप से हवाला दिया था।
गांधी जयंती पर ही क्यों हो रहा है प्रदर्शन? शिवाजी पार्क में इस आंदोलन की अनुमति पुलिस द्वारा नहीं दी गई थी, जिस पर डिपके ने स्पष्ट किया कि वे सत्ता में बैठे लोगों के खिलाफ लड़ रहे हैं। उन्होंने महात्मा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि अंग्रेजों ने कभी भी उनके आंदोलनों को अनुमति नहीं दी थी। वरिष्ठ पत्रकार जतिन Desai के अनुसार, मुंबई का महात्मा गांधी के साथ ऐतिहासिक रिश्ता रहा है। 9 अगस्त 1942 को मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान (ग्वालिया टैंक) से ही गांधी जी ने 'भारत छोड़ो आंदोलन' (Quit India Movement) की शुरुआत की थी।
अभिजीत डिपके ने घोषणा की है कि यह आंदोलन केवल मुंबई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कोलकाता, गोवा, बेंगलुरु और रांची जैसे अन्य प्रमुख शहरों में भी इसका विस्तार किया जाएगा। चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठ रहे इन सवालों और राजनीतिक गहमागहमी ने देश की सियासत में एक बार फिर उबाल ला दिया है।





