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Modi Master प्लान, भारत की वैश्विक ताकत बढ़ाने की रणनीति

प्रधानमंत्री मोदी का ‘मिशन-144’ शुरू, छह देशों की यात्रा में Narendra Modi का मास्टर प्लान, भारत को वैश्विक ताकत के रूप में स्थापित करना।

Modi Master प्लान, भारत की वैश्विक ताकत बढ़ाने की रणनीति
फोटो: Mission 144 Strategy, Oil To Tech
Modi Master Plan: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अपने महत्वाकांक्षी मिशन-144 पर निकल रहे हैं। यह यात्रा अगले छह दिनों में यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली के पांच देशों को कवर करेगी। इस दौरान प्रधानमंत्री भारत की ऊर्जा सुरक्षा, टेक्नोलॉजी और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाएंगे। विश्लेषकों के अनुसार, इस दौरे का मकसद न सिर्फ व्यापार और निवेश बढ़ाना है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति को एक मजबूत विकल्प के रूप में पेश करना भी है, यह मोदी का मास्टर प्लान है।

Modi Master Plan, यूएई में ऊर्जा सुरक्षा पर विशेष जोर 

Modi Master Plan: प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा की शुरुआत अबू धाबी से होगी, जहां वे यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात करेंगे। इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण पहलू ऊर्जा सुरक्षा है। भारत और यूएई के बीच एलपीजी आपूर्ति और स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व को लेकर समझौते होने वाले हैं, जो मोदी का मास्टर प्लान भारत की वैश्विक ताकत बढ़ाने का हिस्सा है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि पश्चिम एशिया में वर्तमान संकट और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर तनाव के चलते तेल और गैस की आपूर्ति में खतरा उत्पन्न हो रहा है। ऐसे समय में यूएई के साथ भारत का यह समझौता देश की ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत करेगा। दोनों देशों के बीच पहले से ही ‘कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ है और यूएई भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक सहयोगी है। 

यूएई में करीब 45 लाख भारतीय निवास कर रहे हैं, जो वहां का दूसरा सबसे बड़ा विदेशी समुदाय है। यह यात्रा न केवल व्यापारिक दृष्टि से बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

नीदरलैंड: सेमीकंडक्टर से ग्रीन हाइड्रोजन तक के समझौते 

Modi Master Plan: प्रधानमंत्री मोदी नीदरलैंड में 15 या 16 मई को पहुंचेंगे। यह भारत और नीदरलैंड के बीच नौ वर्षों में पहली बार हुई उच्च स्तरीय यात्रा है। नीदरलैंड को विश्व की ‘इनोवेशन कैपिटल’ माना जाता है। यहाँ की कंपनियां सेमीकंडक्टर, वाटर मैनेजमेंट और ग्रीन हाइड्रोजन में अग्रणी हैं, और यह मोदी का मास्टर प्लान भारत की तकनीकी क्षमताओं को वैश्विक मंच पर मजबूत करने का हिस्सा है।

भारत और नीदरलैंड के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 28 अरब डॉलर यानी 2.35 लाख करोड़ रुपये है। इसके अलावा नीदरलैंड भारत में चौथा सबसे बड़ा विदेशी निवेशक भी है। इस दौर में तकनीकी सहयोग और निवेश के अवसरों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

स्वीडन में टेक्नोलॉजी और एआई पर चर्चा 

प्रधानमंत्री मोदी 17 और 18 मई को स्वीडन में रहेंगे। यह 43 वर्षों में स्वीडन की प्रधानमंत्री यात्रा है। स्वीडन टेक्नोलॉजी और नवाचार के क्षेत्र में एक पावरहाउस है, और यह कदम India Tech Growth को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

भारत और स्वीडन पिछले वर्षों से क्लीन एनर्जी, स्मार्ट सिटी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और डिफेंस में सहयोग कर रहे हैं। इस यात्रा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, 5G-6G टेक्नोलॉजी और ग्रीन इंडस्ट्री पर विशेष चर्चा होने की संभावना है।

नॉर्वे: भारत-नॉर्डिक समिट और निवेश के नए अवसर

प्रधानमंत्री मोदी 18-19 मई को नॉर्वे के दौरे पर होंगे। 19 मई को ओस्लो में तीसरा ‘इंडिया-नॉर्डिक समिट’ आयोजित होगा, जिसमें नॉर्वे, डेनमार्क, आइसलैंड, फिनलैंड और स्वीडन के नेता हिस्सा लेंगे। इस समिट में ग्रीन ट्रांजिशन, जलवायु परिवर्तन, एआई और स्टार्टअप्स के क्षेत्र में समझौते होंगे।

भारत और यूरोपीय फ्री ट्रेड एसोसिएशन के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट लागू होने के बाद नॉर्वे का सरकारी पेंशन फंड अकेले भारत में लगभग 2.36 लाख करोड़ रुपये का निवेश कर चुका है। यह दौरा भारत को यूरोप में निवेश और व्यापार के नए अवसर प्रदान करेगा।

इटली: स्ट्रैटेजिक एक्शन प्लान और IMEC परियोजना 

India Defense Boost: प्रधानमंत्री मोदी का अंतिम पड़ाव इटली है, जहाँ वे 19-20 मई को रहेंगे और प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से मुलाकात करेंगे। भारत और इटली ने 2025-2029 के लिए एक ‘ज्वाइंट स्ट्रैटेजिक एक्शन प्लान’ तैयार किया है, जिसमें डिफेंस और सुरक्षा मुख्य विषय होंगे। 

इसके अलावा भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप कॉरिडोर (IMEC) परियोजना में इटली की अहम भूमिका होगी। यह परियोजना भारत को यूरोप और मध्य-पूर्व से जोड़ने वाले लॉजिस्टिक और व्यापारिक नेटवर्क को मज़बूत करेगी।

वैश्विक महत्व: ऊर्जा, टेक्नोलॉजी और रणनीतिक विकल्प 

इस दौरे का महत्व केवल तत्काल आर्थिक या तकनीकी लाभ तक सीमित नहीं है। भारत की 2070 तक नेट-जीरो लक्ष्य प्राप्ति के लिए ग्रीन हाइड्रोजन, बैटरी स्टोरेज और एआई जैसी तकनीकें आवश्यक हैं। यूरोप में चीन पर निर्भरता कम करने की कोशिशों के बीच, भारत एक मजबूत विकल्प के रूप में उभर रहा है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि मिशन-144 भारत की कूटनीतिक ताकत को बढ़ाने, वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा में योगदान देने और तकनीकी सहयोग के नए रास्ते खोलने वाला है। इस दौरे के बाद भारत वैश्विक मंच पर एक निर्णायक और भरोसेमंद साझेदार के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा।

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