राष्ट्रपति मैक्रों ने फिलिस्तीन को दी मान्यता
राष्ट्रपति मैक्रों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने बयान में कहा कि वह सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा में औपचारिक रूप से फिलिस्तीन को मान्यता देने का ऐलान करेंगे। उन्होंने लिखा,
“हमें तत्काल युद्धविराम, सभी बंधकों की रिहाई और गाजा में बड़े पैमाने पर मानवीय सहायता की जरूरत है। हमें हमास का निरस्त्रीकरण (demilitarization) करना होगा, गाजा को फिर से सुरक्षित और पुनर्निर्मित करना होगा —और एक फिलिस्तीनी राष्ट्र बनाना होगा।”
गौरतलब है कि अक्टूबर 2023 से गाजा पट्टी में इजरायल और हमास के बीच युद्ध छिड़ा हुआ है, जिसमें हजारों जानें जा चुकी हैं।
इजरायल ने राष्ट्रपति मैक्रों के फ़ैसले का विरोध किया
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फ्रांस के इस फैसले को आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा,
“यह निर्णय ईरान के एक और प्रॉक्सी की भूमिका निभाने वाले राष्ट्र को जन्म देगा, जैसा कि गाजा बना था। ऐसे हालात में एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य इजरायल के विनाश का लॉन्च पैड बन सकता है।” फिलिस्तीनी संगठन Palestine Liberation Organization (PLO) ने फ्रांस के निर्णय की सराहना की है। संगठन के उपाध्यक्ष हुसैन अल-शेख ने कहा,
“यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानून और फिलिस्तीनी जनता के आत्मनिर्णय के अधिकार के प्रति फ्रांस की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”
अब तक दुनिया के 140 से अधिक देश फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दे चुके हैं, जिनमें यूरोप के एक दर्जन से अधिक देश शामिल हैं। हालांकि, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस जैसे G-7 राष्ट्र अभी तक इससे पीछे रहे हैं। फिलिस्तीन के लोग वेस्ट बैंक, ईस्ट यरुशलम और गाजा पट्टी को मिलाकर एक संप्रभु राष्ट्र की मांग करते हैं। 1967 के अरब-इजरायल युद्ध में इजरायल ने इन क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया था।
ईस्ट यरुशलम को इजरायल अपनी राजधानी मानता है।
वेस्ट बैंक में अब तक 5 लाख से अधिक यहूदी बस्तियां बस चुकी हैं, जबकि यहां 30 लाख फिलिस्तीनी भी रहते हैं।
इस इलाके में इजरायली सैन्य नियंत्रण कायम है।





