न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, एडवोकेट साकेत गुप्ता, जिन्होंने खुद को प्रवेश वर्मा का प्रतिनिधि बताया, ने इस मामले में अपनी आपत्ति रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) के सामने रखी। उन्होंने कहा, "अरविंद केजरीवाल ने अपने नामांकन में अपनी आय 2019-2020 के बीच केवल 1,57,823 रुपये दर्शाई है, जो मासिक रूप से 13,152 रुपये के बराबर होती है। यह आंकड़ा पूरी तरह से गलत और वास्तविकता से परे है। दस्तावेज़ों के अनुसार, मुख्यमंत्री को हर दिन 20,000 रुपये का वेतन मिलता है और साथ ही 1,000 रुपये का दैनिक भत्ता भी दिया जाता है।
उनका यह बयान न्यूनतम वेतन अधिनियम का उल्लंघन करता है और साफ तौर पर यह वोटरों को गुमराह करने का प्रयास है।"
साकेत गुप्ता ने इसके अलावा और भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था, "हमने वोटर लिस्ट में भी गड़बड़ी पाई। वार्ड नंबर 52 में वोट नंबर 709 होने का दावा किया गया था, जबकि जब हमने जांच की, तो पाया कि वहां वोट नंबर 1 से लेकर 708 तक ही थे। यह एक और बड़ा झूठ है। इसके अलावा, उनका वोट चांदनी चौक के वार्ड नंबर 105 में नंबर 1307 पर रजिस्टर्ड है।
हालांकि, उन्होंने अपने नामांकन फॉर्म में नई दिल्ली को पंजीकृत किया है। यह पूरी तरह से गलत है, और इससे यह साफ जाहिर होता है कि केजरीवाल ने जानबूझकर इस गलत जानकारी का इस्तेमाल किया।"
गुप्ता ने यह भी आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल का वोट गाजियाबाद के कौशाम्बी में भी पंजीकृत है, वार्ड नंबर 72, वोट नंबर 991 पर। उनका सवाल था, "अगर उनका वोट यूपी में पंजीकृत है, तो वह दिल्ली विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार कैसे बन सकते हैं?"
गुप्ता ने कहा कि इस मामले में और भी कई विसंगतियां हैं, और केजरीवाल ने जानबूझकर उन जानकारी को छिपाया है, जो उनके नामांकन के लिए जरूरी थी।
इसके अलावा, उन्होंने यह भी बताया कि केजरीवाल के खिलाफ नॉर्थ एवेन्यू पुलिस स्टेशन में गंभीर धाराओं के तहत तीन मामले पहले से ही दर्ज हैं, लेकिन उन्होंने अपने हलफनामे में इन मामलों का उल्लेख तक नहीं किया। यह एक और गंभीर आरोप था, जो उनके नामांकन को वैध नहीं मानने की ओर इशारा करता है।
इस पूरे मामले को लेकर रिटर्निंग ऑफिसर ने अरविंद केजरीवाल के नामांकन को फिलहाल रोक दिया है और अब इस मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद ही रिटर्निंग ऑफिसर इस मामले पर अंतिम फैसला लेंगे। इस घटनाक्रम से दिल्ली विधानसभा चुनाव में केजरीवाल के नामांकन की वैधता पर सवाल उठ गए हैं, और यह पूरी प्रक्रिया अब विवादों में घिर गई है।
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