मनीषा मौत मामले में एक नया और बड़ा मोड़ आ गया है। पुलिस की जांच से असंतुष्ट मृतका के पिता संजय ने सीबीआई (CBI) की विशेष अदालत का दरवाजा खटखटाया है। पिता ने पुलिस पर मामले की जांच में भारी लापरवाही बरतने, सबूतों को नजरअंदाज करने और प्रभावशाली लोगों को बचाने का गंभीर आरोप लगाते हुए 'विरोध याचिका' (Protest Petition) दाखिल की है।
अदालत ने इस याचिका को स्वीकार कर लिया है और मामले में अगली सुनवाई की तारीख तय कर दी है। कोर्ट के इस कदम से पीड़ित परिवार को एक बार फिर न्याय की उम्मीद जगी है।
सीबीआई के पूर्व उप कानूनी सलाहकार के माध्यम से याचिका ढाणी लक्ष्मण निवासी याचिकाकर्ता संजय ने यह याचिका सीबीआई के पूर्व उप कानूनी सलाहकार एडवोकेट हर्ष मोहन सिंह के माध्यम से कोर्ट में दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने जांच की शुरुआत से ही अपनी दिशा गलत रखी। परिजनों का कहना है कि उनके पास हत्या के स्पष्ट संकेत थे, लेकिन पुलिस ने मामले को शुरुआत से ही आत्महत्या का रूप देने का प्रयास किया।
याचिका में उठाए गए मुख्य बिंदु: चोट के निशान और पोस्टमार्टम में विसंगतियां: मनीषा के शरीर पर मिले चोट के निशानों की पुलिस ने गहराई से जांच नहीं की। इसके अलावा, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौजूद कमियों पर भी ध्यान नहीं दिया गया।
सबूतों के साथ खिलवाड़ और देरी: घटना के तुरंत बाद जो वैज्ञानिक और फॉरेंसिक जांच होनी चाहिए थी, उसमें देरी की गई। इस वजह से घटनास्थल से मिले कई अहम सुराग और वैज्ञानिक सबूत दूषित या नष्ट हो गए।
गवाहों और संदिग्धों की अनदेखी: पुलिस ने मामले से जुड़े कई संदिग्ध व्यक्तियों से ठीक से पूछताछ नहीं की। वहीं, जिन चश्मदीदों ने घटना से पहले इलाके में संदिग्ध गतिविधियां देखी थीं, उनके बयानों को भी दरकिनार कर दिया गया।
पुलिस अधिकारियों पर दबाव में काम करने का आरोप: याचिका में कुछ पुलिस अधिकारियों पर पक्षपात करने और लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की मांग की गई है।
निष्पक्ष एजेंसी से दोबारा जांच की मांग गौरतलब है कि पुलिस ने इस मामले में अपनी अंतिम रिपोर्ट (Final Report) दाखिल कर दी थी, जिसमें कुछ संदिग्ध लोगों को दोषमुक्त (क्लीन चिट) करार दे दिया गया था। पिता संजय ने इसी क्लोजर रिपोर्ट को अदालत में चुनौती दी है।
याचिका में अदालत से मांग की गई है कि:
इस पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी (जैसे सीबीआई) से कराई जाए, या
अदालत स्वयं अपनी निगरानी में इस मामले की नए सिरे से जांच का आदेश दे।
परिजनों का छलका दर्द, स्थानीय लोगों और किसान संगठनों में आक्रोश मनीषा के पिता संजय ने भावुक होकर कहा, "हमने कई बार वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मिलकर अपनी आशंकाएं जताई थीं, लेकिन हमारी एक न सुनी गई। अब हमें केवल अदालत से ही न्याय की उम्मीद है।"
इस घटना को लेकर केवल परिवार ही नहीं, बल्कि क्षेत्र के लोगों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और किसान संगठनों में भी गहरा आक्रोश है। लोग लगातार निष्पक्ष जांच और दोषियों को सख्त सजा देने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। अब अदालत पुलिस की अंतिम रिपोर्ट और पिता की विरोध याचिका दोनों पर एक साथ विचार करेगी।
SEO Meta





