नई दिल्ली: देश की राजनीति में एक बार फिर से 'वोट चोरी' और चुनाव प्रणाली को लेकर घमासान छिड़ गया है। हाल ही में कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने एक इंटरव्यू के दौरान केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह सरकार केवल 'चोरों की' नहीं, बल्कि 'चोरी से बनाई गई सरकार' साबित हो चुकी है। ऐसे में देश के सबसे बड़े लोकतंत्र को बचाने के लिए नए सिरे से लोकसभा चुनाव कराने के अलावा अब कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है।
"बैरिकेड्स और पुलिसिया सख्ती जनता की भावना नहीं रोक सकती"
दिल्ली में विपक्ष के विरोध मार्च और पुलिस द्वारा रोके जाने के सवाल पर संदीप दीक्षित ने कहा कि बैरिकेड्स लगाकर जनता की आवाज या विचारों को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि जब राहुल गांधी ने डेढ़-दो साल पहले इस मुद्दे को उठाया था, तब कई लोगों ने मजाक उड़ाया था, लेकिन आज वही लोग और पूरा विपक्ष इस मुहिम के साथ खड़ा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आज जो लोग सड़कों पर क्रांतिकारी नारे लगा रहे हैं, वे कल तक इस मुद्दे पर हंसते थे, लेकिन अब सच्चाई देश के मन-मस्तिष्क में बैठ चुकी है।
दिल्ली पुलिस के रवैये पर गृह मंत्री को घेरा
दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए संदीप दीक्षित ने पूर्व और वर्तमान के दौर की तुलना की। उन्होंने कहा कि जब उनकी पार्टी की सरकार थी और वे आरएसएस के खिलाफ प्रोटेस्ट करते थे, तब पुलिस उन्हें रोकती जरूर थी लेकिन कभी बदतमीजी नहीं करती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि आज दिल्ली पुलिस का जो आक्रामक और असहयोग वाला चेहरा दिख रहा है, वह पुलिस का नहीं बल्कि उसके गृह मंत्री का चेहरा है। उन्होंने दो टूक कहा कि मछली तालाब को ऊपर से गंदा करती है, और यदि मुखिया का चरित्र ही ऐसा होगा तो पुलिस भी वैसा ही आचरण करेगी। हालांकि, उन्होंने विश्वास जताया कि यदि देश की सरकार बदल जाए, तो यही दिल्ली पुलिस डेढ़ साल के भीतर सबसे नैतिक फोर्स बन जाएगी।
ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा महज एक 'प्रतीकात्मक' कदम
विपक्ष की मुख्य मांगों पर बात करते हुए संदीप दीक्षित ने स्पष्ट किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा एक सिम्बॉलिक (प्रतीकात्मक) कदम है, जो कि इस पूरी प्रक्रिया का सिर्फ एक हिस्सा है। असली मुद्दा यह है कि अगर यह साबित हो चुका है कि यह चोरी की सरकार है, तो अगले दो-तीन साल तक एक गलत तरीके से चुनी हुई सरकार को देश पर राज करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि देश में तुरंत फ्रेश लोकसभा चुनाव कराए जाने चाहिए ताकि लोकतंत्र की पवित्रता बहाल हो सके।
वैचारिक गहराई और जन-आंदोलन की जरूरत
पॉलिटिकल मोबिलाइजेशन और विपक्ष की एकजुटता पर चर्चा करते हुए दीक्षित ने कहा कि राजनीति में भीड़ जुटाना और आंदोलन करना एक हिस्सा है, लेकिन इसके पीछे गहन वैचारिक चिंतन और वैचारिक स्पष्टता होना बेहद जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल चेहरे बदलने से नीतियां नहीं बदलतीं, बल्कि असली बदलाव जनता की बुनियादी जरूरतों और व्यवस्थागत सुधारों को समझकर ही लाया जा सकता है।
अंत में उन्होंने दोहराया कि राहुल गांधी ने जिस वोट चोरी के मुद्दे की नींव रखी थी, वह आज देशव्यापी जन-चेतना का रूप ले चुका है। अब यह आने वाला वक्त ही बताएगा कि यह सियासी संघर्ष किस अंजाम तक पहुंचता है।
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