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भारत ने यूएन में जीना रोमेरो के दावों को किया खारिज

भारत ने जीना रोमेरो के आरोपों को असत्यापित और अनाम जानकारी पर आधारित बताया।

भारत ने यूएन में जीना रोमेरो के दावों को किया खारिज
फोटो: India Rejects Claims by UN Rapporteur Gina Romero

भारत का स्पष्ट जवाब

भारत ने संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत जीना रोमेरो द्वारा उठाए गए आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है, जिनमें उन्होंने कहा था कि भारतीय युवाओं को मानसिक स्वास्थ्य और लैंगिक न्याय पर चर्चा करने पर प्रतिशोध का सामना करना पड़ता है। इस संबंध में भारतीय राजनयिक अनुज स्वरूप ने स्पष्ट शब्दों में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ये आरोप अनाम और असत्यापित जानकारी पर आधारित हैं।


संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की तीसरी समिति के 81वें सत्र के दौरान अनुज स्वरूप ने बताया कि भारत का संविधान हर नागरिक को स्वतंत्रता प्रदान करता है। उन्होंने कहा, "भारत ने शांतिपूर्ण सभा और संगठन की स्वतंत्रता के संबंध में विशेष दूत की रिपोर्ट पर ध्यान दिया है। अनुच्छेद 19 के तहत हर नागरिक को बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी दी गई है, जिसकी सुरक्षा एक स्वतंत्र न्यायपालिका, स्वतंत्र प्रेस और सशक्त राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा की जाती है।"


रोमेरो की रिपोर्ट पर प्रश्न

अनुज स्वरूप ने रोमेरो की रिपोर्ट का हवाला देते हुए भारत के युवाओं के खिलाफ उठाए गए आरोपों पर सवाल उठाए। उल्लेखनीय है कि यह रिपोर्ट उस समय आई है जब भारत में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ युवाओं का भारी विरोध प्रदर्शन चल रहा है।


जीना रोमेरो का दावा है कि भारतीय युवाओं को मानसिक स्वास्थ्य और लैंगिक न्याय पर चर्चा करने के लिए प्रतिशोध का सामना करना पड़ता है, लेकिन उन्होंने इसके समर्थन में केवल फुटनोट में कुछ गुमनाम जानकारियों का उल्लेख किया है। भारत ने यह स्पष्ट किया कि इस प्रकार की मनमानी रिपोर्टिंग संयुक्त राष्ट्र की संस्थाओं की विश्वसनीयता को कमजोर कर रही है।


भारत में युवा आंदोलनों की स्थिति

अनुज स्वरूप ने कहा, "विडंबना यह है कि इसी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय युवाओं ने एक व्यंग्यात्मक राजनीतिक आंदोलन शुरू किया। किस दमनकारी देश में युवा ऐसे आंदोलनों को चला सकते हैं, सरकार से सवाल पूछ सकते हैं और राजधानी तक मार्च कर सकते हैं?" उन्होंने केंद्रीय मंत्रियों और 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के प्रतिनिधिमंडल के बीच हुई बातचीत का भी उल्लेख किया।


स्वरूप ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयुक्त वोल्कर तुर्क के पिछले महीने दिए गए बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत में युवाओं के नेतृत्व वाले आंदोलनों के संदर्भ में चर्चा करना अधिक प्रभावी होता है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने युवाओं के साथ सकारात्मक संवाद स्थापित किया है और परीक्षा में धांधली रोकने के लिए ठोस कदम उठाए हैं।


तथ्यों की जांच पर जोर

अनुज स्वरूप ने कहा, "एक प्रतिनिधि जो 1.4 अरब लोगों के बारे में सामान्य राय बनाने के लिए अनाम जानकारियों पर निर्भर रहती है, वह अपने जनादेश के साथ अन्याय कर रही है। हम इस विशेष प्रतिवेदक से आग्रह करते हैं कि किसी की आलोचना करने से पहले वे तथ्यों की जांच करें और अपनी रिपोर्ट में गंभीरता व निष्पक्षता लाएं।"


इस प्रकार, भारत ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी प्रकार के दावों का गंभीरता से जवाब देने के लिए तत्पर है और उचित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए अपनी स्थिति को स्पष्ट करता रहेगा।