नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में सियासी पारा लगातार उफान पर है। विपक्षी दलों और 'इंडिया' गठबंधन के नेतृत्व में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच नेताओं और कार्यकर्ताओं के तेवर बेहद तीखे हो चुके हैं। हाल ही में सामने आए एक इंटरव्यू और विरोध प्रदर्शन के दौरान विपक्ष ने केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सीधा और गंभीर हमला बोला है। वक्ताओं का कहना है कि अब लोकतंत्र की यह लड़ाई सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की आम जनता के दिलों में गहरी पैठ बना चुकी है।
"बीजेपी समर्थक भी अब विरोध में आ रहे हैं"
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने दावा किया कि सांसदों, छात्रों और आम नागरिकों के साथ जिस तरह का दमनकारी और प्रशासनिक रवैया अपनाया जा रहा है, उसे देश की जनता भली-भांति समझ चुकी है। स्थिति यहाँ तक पहुँच चुकी है कि अब पारंपरिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का समर्थन करने वाले लोग भी खुलकर सरकार के खिलाफ खड़े होने लगे हैं। विपक्ष का कहना है कि सरकार को इस लोकतंत्र की ताकत का अंदाजा नहीं है और उसे यह बात अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए कि आज नहीं तो कल तानाशाही को झुकना ही पड़ेगा।
विपक्ष की तीन मुख्य मांगें: एसआईआर और इस्तीफे की हुंकार
विरोध प्रदर्शन के दौरान विपक्ष ने अपनी तीन सूत्रीय और स्पष्ट माँगे देश के सामने रखी हैं:
-
एसआईआर (SIR) का संपूर्ण खात्मा: इसे बिना किसी शर्त के तुरंत पूरी तरह से समाप्त किया जाए।
-
ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा: मुख्य चुनाव आयुक्त को तत्काल अपने पद से इस्तीफा देना होगा।
-
मतदाता सूची की बहाली: जिन 13 करोड़ से अधिक लोगों के नाम वोटर लिस्ट से काटे गए हैं, उनकी फौरन बहाली की जाए और पुराने वोटर रोल के आधार पर ही आगामी चुनाव कराए जाएं।
'तोते' वाली टिप्पणी पर सियासत और प्रेस कॉन्फ्रेंस की चुनौती
राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर भी चर्चा तेज है कि चुनाव आयोग पर जब भी गंभीर आरोप लगते हैं, तब मुख्य चुनाव आयुक्त खुद सामने आकर जवाब देने के बजाय भाजपा के प्रवक्ताओं को सफाई देने के लिए आगे कर देते हैं। विपक्ष ने तीखा तंज कसते हुए कहा कि यदि चुनाव आयोग और सरकार में जरा भी हिम्मत है, तो ज्ञानेश कुमार सामने आकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करें और देश की जनता को स्पष्टीकरण दें कि आखिर वे क्या कर रहे हैं। राहुल गांधी द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखाई गई कॉन्सपिरेटर्स (साजिशकर्ताओं) की सूची का हवाला देते हुए विपक्ष ने कहा कि इसमें ज्ञानेश कुमार और गौतम अडानी जैसे चेहरों के साथ-साथ शीर्ष नेतृत्व के नाम भी शामिल हैं, और आने वाले समय में इनके खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
"नरेंद्र मोदी के दिन गिनती के हैं"
महिला नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भारी भीड़ और पुलिसिया बैरिकेडिंग के बीच अपनी बात रखते हुए कहा कि चार दिनों से लगातार चल रहे इन प्रोटेस्ट्स में पुलिस का रवैया लोकतंत्र के बिल्कुल विपरीत है। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के दिन गिनती के बचे हैं और वे अपना पूरा कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएंगे। विपक्ष ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी सभी माँगे पूरी नहीं होतीं, तब तक यह आंदोलन और जन-आग्रह इसी तरह जारी रहेगा।
इस पूरी खबर को वीडियो फॉर्मेट में देखिए के लिए, क्लिक करें नीचे दिए गए लिंक पर - https://youtu.be/0xq3CrHrSkE?si=CLzv_tsILvoI5FRs





