Molitics Logo
होम रिपोर्ट्स दिल्ली में 'वोट चोरी' और SIR विवाद पर महासंग्राम: जंतर-मंतर पर विपक्ष का जोरदार प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई
रिपोर्ट्स • दिल्ली

दिल्ली में 'वोट चोरी' और SIR विवाद पर महासंग्राम: जंतर-मंतर पर विपक्ष का जोरदार प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई

दिल्ली में वोटर लिस्ट में गड़बड़ी और 'वोट चोरी' को लेकर जंतर-मंतर पर विपक्ष का बड़ा प्रदर्शन।

दिल्ली में 'वोट चोरी' और SIR विवाद पर महासंग्राम: जंतर-मंतर पर विपक्ष का जोरदार प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई
फोटो: Jantar Mantar protest, Vote theft controversy, Election Commission ECI, Voter list discrepancy SIR, Opposition leaders Delhi

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में चुनावी सूचियों में कथित गड़बड़ियों और 'वोट चोरी' के गंभीर आरोपों को लेकर राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर है। जंतर-मंतर क्षेत्र को पूरी तरह छावनी में तब्दील कर भारी पुलिस बल, अर्धसैनिक बलों और आईटीबीपी (ITBP) के जवानों की तैनाती की गई है। इसके बावजूद, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत 'इंडिया' गठबंधन के तमाम दिग्गज नेता, सांसद और हजारों की संख्या में पार्टी कार्यकर्ता व छात्र संगठन सड़कों पर उतर आए हैं। चुनाव आयोग (ECI) के दफ्तर की ओर मार्च करने से रोके जाने के बाद विपक्ष ने सड़क पर ही डेरा डाल दिया है, जिसके चलते राजधानी में जबरदस्त राजनीतिक और प्रशासनिक घमासान मचा हुआ है।

विरोध प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई: संघर्ष के बीच तीखे तेवर

पिछले कई दिनों से दिल्ली में छात्र संगठनों (जैसे आइसा, एसएफआई, एआईएसएफ और सीजेपी) और विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा लगातार प्रदर्शन किए जा रहे हैं। मंगलवार और उसके बाद के घटनाक्रम में स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने बैरिकेडिंग और कड़े सुरक्षा उपायों का सहारा लिया।

कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पुलिस ने लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ अत्यधिक बल प्रयोग किया। कई कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि बसों के अंदर भी उनके साथ मारपीट की गई और धमकियां दी गईं। इसके बावजूद, विपक्षी नेताओं का स्पष्ट कहना है कि जब तक चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) इस देश के करोड़ों नागरिकों के मताधिकार पर डाले गए डाके का जवाब नहीं देते और इस्तीफा नहीं देते, तब तक यह संघर्ष और तेज किया जाएगा। कल राहुल गांधी को डिटेन किए जाने के बाद आज फिर से विपक्षी सांसद और नेता बसों के भीतर और सड़कों पर विरोध जताते नजर आए।

'वोट चोरी' का विवाद: 16 लाख 'गायब' वोट और एसआईआर (SIR) के आंकड़े

इस पूरे आंदोलन की जड़ें उत्तर प्रदेश में हुए विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) और मतदाता सूचियों में सामने आए भारी विरोधाभासों से जुड़ी हैं। विपक्षी दलों और 'द रिपोर्टर्स कलेक्टिव' जैसी स्वतंत्र रिपोर्ट्स के हवाले से यह गंभीर सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर चुनावी प्रक्रिया में इतनी बड़ी गड़बड़ियां कैसे हुईं।

  1. करोड़ों नाम हटना और अचानक जुड़ना: उत्तर प्रदेश में एसआईआर की पहली ड्राफ्ट वोटर लिस्ट आने पर लगभग 2 करोड़ 89 लाख नाम सूची से बाहर हो गए थे। इसके बाद, आनन-फानन में जो नए नाम जोड़े गए, उनमें उत्तर प्रदेश के अन्य राज्यों की तुलना में एक बेहद असामान्य आंकड़ा देखा गया—कटे हुए वोटों का लगभग 96.27% हिस्सा वापस जोड़ दिया गया, जबकि पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में यह वापसी मात्र 18.5% के आसपास थी।

  2. 16 लाख फॉर्म-6 का रहस्य: मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) की वेबसाइट पर ड्राफ्ट लिस्ट आने से पहले बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर एकत्र किए गए 16 लाख 18 हजार फॉर्म-6 का पूरा ऑडिट ट्रेल और डेटा सार्वजनिक नहीं किया गया।

  3. लाखों का अंतर: फाइनल वोटर लिस्ट में जितने नए वोट जोड़े गए और कुल फॉर्म-6 आवेदनों की संख्या के बीच लगभग 12 लाख 92 हजार का बड़ा अंतर देखने को मिला, जिससे चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर संदेह खड़े हो गए हैं।

राजनीतिक दलों और नेताओं का कड़ा रुख

प्रदर्शन के दौरान युवा कांग्रेस, एनएसयूआई (NSUI) और विभिन्न विपक्षी दलों के नेताओं ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि 140 करोड़ देशवासियों का सबसे बड़ा अधिकार उनका 'वोट देने का अधिकार' है, जो बिना किसी भेदभाव के अमीर, गरीब, छोटे या बड़े हर नागरिक को समान ताकत देता है। यदि उसी मताधिकार के साथ छेड़छाड़ की जाएगी, तो देश का युवा और विपक्ष चुप नहीं बैठेगा।

नेताओं ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग एक निष्पक्ष संवैधानिक संस्था के रूप में काम करने के बजाय सत्ताधारी दल के इशारों पर काम कर रहा है। यही वजह है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर यह आंदोलन अब राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ता जा रहा है।

आगे की राह और बढ़ता राजनीतिक तनाव

फिलहाल जंतर-मंतर और उसके आसपास का इलाका राजनीतिक रणक्षेत्र बना हुआ है। एक तरफ जहां सरकार की ओर से विभिन्न योजनाओं और विकास कार्यों के प्रचार-प्रसार के जरिए माहौल को संभालने की कोशिश हो रही है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष ने साफ कर दिया है कि यह लड़ाई केवल एक दिन की नहीं है।

आने वाले दिनों में विभिन्न छात्र संगठनों और विपक्षी दलों का यह साझा आक्रोश देश के अन्य हिस्सों में भी फैल सकता है। संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के नाम पर शुरू हुआ यह विवाद आने वाले समय में भारतीय राजनीति की दिशा तय करने में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है, जहाँ निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता और जवाबदेही सबसे बड़ा सवाल बन चुकी है।
इस पूरी खबर को वीडियो फॉर्मेट में देखिए के लिए, क्लिक करें नीचे दिए गए लिंक पर - https://youtu.be/dDJXZLowLlY?si=ADKZVWl3V9UL9yXs

Video