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पीएम मोदी मुख्य न्यायाधीश के घर पहुँचे तो संवैधानिक पद की गरिमा को लेकर उठे सवाल

सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश ने पीएम मोदी को एक निजी बैठक के लिए अपने आवास पर आने की अनुमति देकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिये है। उन्होंने कहा कि इससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता, नागरिकों के अधिकारों की रक्षा और सरकार की जवाबदे

पीएम मोदी मुख्य न्यायाधीश के घर पहुँचे तो  संवैधानिक पद की गरिमा को लेकर उठे सवाल
फोटो: पीएम मोदी मुख्य न्यायाधीश के घर पहुँचे तो संवैधानिक पद की गरिमा को लेकर उठे सवाल
भारत में कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका में स्पष्ट विभाजन है। न्यायपालिका का काम सरकार के कामकाज पर नज़र रखना है। ऐसे मे यह परंपरा रही है कि न्यायाधीश और सरकार के प्रतिनिधियों में औपचारिक संबंध ही रहें। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने मुख्यन्यायाधीश डी.वाई.चंद्रचूड़ के घर गणपति पूजा में शामिल होकर इस परंपरा को तोड़ दिया है जिसे लेकर काफ़ी सवाल उठ रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर भारत के मुख्य न्यायाधीश डी.वाई चंद्रचूड़ के साथ का एक वीडियो साझा किया है, जिसमें वह मुख्य न्यायाधीश के आवास पर गणेश चतुर्थी की पूजा करते हुए नज़र आ रहे है। वीडियो पर तमाम क़ानूनविदों और विपक्ष की तरफ़ से तीख़ी प्रतिकिया आयी है। यहाँ तक की आम लोगों की तरफ़ से भी प्रधानमंत्री मोदी और मुख्य न्यायाधीश को आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। कहा जा रहा है कि तमाम मामलों में सरकार सुप्रीमकोर्ट में एक पार्टी की तरह होती है। ऐसे मे ंपीएम का मुख्य न्यायधीश के घर जाना फैसलों पर सवालिया निशान लगा सकता है।

शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने न्यायिक पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े किये है। राउत ने कहा, “हमारी चिंता यह है कि जब संविधान के संरक्षक इस तरह से राजनीतिक नेताओं से मिलते है, तो संदेह पैदा होता है। वर्तमान में हमारा एक केस सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है, मुख्य न्यायाधीश मामले की सुनवाई कर रहे है और प्रधानमंत्री मोदी भी केस का हिस्सा है। हमें इस बात की चिंता है कि हमें न्याय मिलेगा या नहीं। राउत ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश को कोर्ट में उनके केस से अलग होने पर विचार करना चाहिये।

शिवसेना (यूबीटी) से राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर उम्मीद जताई कि उत्सव के बाद मुख्य न्यायाधीश महाराष्ट्र की राजनीतिक स्थिति पर सुनवाई ख़त्म करने पर ध्यान केंद्रित करेंगे। सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश ने पीएम मोदी को एक निजी बैठक के लिए अपने आवास पर आने की अनुमति देकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिये है। उन्होंने कहा कि इससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता, नागरिकों के अधिकारों की रक्षा और सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करने में मुख्य न्यायाधीश की भूमिका पर संदेह खड़ा होगा। इसलिए समय-समय पर कई बार इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच दूरी रहनी चाहिए।

राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) से राज्यसभा सांसद मनोज झा ने कहा, “मुख्य न्यायाधीश के आवास पर पीएम मोदी के जाने को लेकर विपक्ष सवाल उठा रहा है, सिर्फ इतना समझना बेईमानी होगी। हर संस्था का स्वतंत्रत रहना सिर्फ़ सैद्धांतिक काम नहीं है, बल्कि यह दिखना भी चाहिए। गणपति पूजा जो कि एक व्यक्तिगत मामला है, उसमें कैमरा लेकर जाना, और उस से जो संदेश दिया जा रहा है, वह बहुत ही असहज करता है। मुख्य न्यायधीश और प्रधानमंत्री का पद बहुत बड़ा पद है, और संवैधानिक व्याख्या के बावजूद वीडियो को सार्वजनिक रूप से साझा किया गया, तो इसपर क्या ही कहा जा सकता है।”

प्रसिद्ध वकील इंदिरा जय सिंह ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश ने कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच की शक्तियों से समझौता किया है। मुख्य न्यायाधीश की निष्पक्षता और स्वतंत्रता से पूरा भरोसा उठ चुका है। जिस तरह से शक्तियों से समझौता किया जा रहा है, ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के बार काउंसिल को इसकी कड़ी निंदा करनी चाहिए।