याचिका में यह भी कहा गया कि खनन के कारण नदी के पानी को भारी पंपों के जरिए दूसरी जगह डाला जा रहा है, जिससे नदी का जलस्तर गिर रहा है और आसपास की कृषि भूमि पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
यह खनन कार्य एक कृषि क्षेत्र में हो रहा है, जो कानूनन असंवैधानिक है। मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी. नरेंदर और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ ने ऊधमसिंह नगर के एसएसपी को कड़े निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि जिला पुलिस के सभी एसएचओ को वायरलैस के माध्यम से संदेश भेजा जाए ताकि वे अवैध खनन से जुड़ी गतिविधियों पर नजर रखें और जहां भी खनन हो रहा हो, वहां की संबंधित मशीनों को जब्त किया जाए।
साथ ही, कोर्ट ने निर्देश दिए कि अवैध खनन में संलिप्त सभी व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाए और इस पर कार्रवाई की रिपोर्ट अगली सुनवाई तक पेश की जाए।
अगर याचिकाकर्ता को इस मामले को लेकर कोई धमकी मिलती है तो उसे सुरक्षा प्रदान करने के आदेश भी दिए गए हैं। इसके अलावा, कोर्ट ने यह सुनिश्चित करने को कहा कि खनन कार्य में संलिप्त लोगों को दंडित किया जाए और इस मामले की पूरी जानकारी 4 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई तक कोर्ट में पेश की जाए। यह मामला न केवल नदी के पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर है, बल्कि यह कृषि भूमि के नुकसान और अवैध खनन के कारण उत्पन्न होने वाली समस्याओं से भी जुड़ा हुआ है।
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