जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "कारगिल युद्ध समाप्त होने के महज तीन दिन बाद, 29 जुलाई 1999 को वाजपेयी सरकार ने 'कारगिल समीक्षा समिति' का गठन किया था। इस समिति की रिपोर्ट 23 फरवरी 2000 को संसद में पेश की गई थी, हालांकि कुछ महत्वपूर्ण बातें आज भी गोपनीय हैं और रहनी चाहिए।" उन्होंने आगे लिखा, "उस समिति की अध्यक्षता भारत के प्रमुख रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ के. सुब्रह्मण्यम ने की थी, जो विदेश मंत्री एस. जयशंकर जी के पिता हैं। अब सवाल उठता है, क्या मोदी सरकार 'पहलगाम' की घटना पर भी ऐसी ही कोई समीक्षा करवाएगी, भले ही एनआईए जांच कर रही हो?"
यह बयान अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया दावे से जुड़ा हुआ है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके कार्यकाल में भारत और पाकिस्तान के बीच एक बड़ा परमाणु संघर्ष टल गया था और इसमें अमेरिका की भूमिका थी। ट्रंप ने कहा, "शनिवार को हमने भारत और पाकिस्तान के बीच एक स्थायी युद्धविराम कराया। यह समझौता लंबी अवधि तक प्रभावी रहेगा, और हमने एक बड़ा परमाणु टकराव टाल दिया।"
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने भारत और पाकिस्तान से कहा था कि यदि वे युद्ध बंद करते हैं, तो अमेरिका उनके साथ बड़ा व्यापार करेगा, और यदि वे नहीं मानते, तो कोई व्यापार नहीं होगा। ट्रंप ने कहा, "लोगों ने कभी व्यापार को इस तरह से इस्तेमाल नहीं किया जैसे मैंने किया। मैंने कहा – युद्ध बंद करो, तो व्यापार होगा, नहीं तो कुछ नहीं। और उन्होंने युद्ध बंद कर दिया।" भारत सरकार के सूत्रों के मुताबिक, भारत और पाकिस्तान के सैन्य प्रमुखों (डीजीएमओ) ने आपसी सहमति से सभी तरह की सैन्य कार्रवाई – जमीन, हवा और समुद्र – को रोकने का फैसला किया था। भारत ने स्पष्ट किया कि इसमें कोई तीसरी पार्टी, यानी अमेरिका, शामिल नहीं थी।





