मंगलवार (4 मार्च) को भगवंत मान ने कहा, "कभी रेल रोको, कभी सड़क रोको, कभी कुछ रोको... मेरी नरमी को यह मत समझा जाए कि मैं कार्रवाई नहीं कर सकता। पंजाब धीरे-धीरे धरनों का राज्य बनता जा रहा है, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। अगर किसानों को सिर्फ मोर्चा ही लगाना था, तो फिर ढाई घंटे की बैठक का क्या मतलब? पंजाब धरनों से रुकेगा नहीं, बल्कि चलता रहेगा।"
मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद किसानों की नाराजगी और बढ़ गई है। वे पहले ही पंजाब सरकार पर अपनी मांगों की अनदेखी का आरोप लगा रहे हैं।
पुलिस का एक्शन और किसानों की प्रतिक्रिया
5 मार्च को चंडीगढ़ में पंजाब सरकार के खिलाफ बड़े प्रदर्शन की योजना बना रहे किसान संगठनों के नेताओं पर पंजाब पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। किसान नेता सरवन सिंह पंढेर का दावा है कि राज्यभर में विभिन्न किसान संगठनों के 35 वरिष्ठ नेताओं को या तो हिरासत में ले लिया गया है या फिर नजरबंद कर दिया गया है।
गौरतलब है कि 3 मार्च को किसान संगठनों के 40 नेताओं ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ बैठक की थी, लेकिन बैठक के दौरान तीखी बहस के बाद मुख्यमंत्री गुस्से में उठकर चले गए। किसानों ने इसे अपमानजनक बताया और कहा कि सरकार उनके मुद्दों को गंभीरता से नहीं ले रही है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और बढ़ता विवाद
किसानों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर पंजाब में विपक्षी दलों ने आम आदमी पार्टी सरकार को घेर लिया है।
केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, "भगवंत मान की सरकार ने पंजाब में आपातकाल जैसे हालात बना दिए हैं। किसानों से जुड़े मुद्दों पर अपनी पोल खुलती देख अब सरकार दमनकारी कार्रवाई कर रही है। यह पंजाब में AAP सरकार की किसान विरोधी मानसिकता को दर्शाता है।"
वहीं, पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने भी मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा, "भगवंत मान को बर्खास्त किया जाना चाहिए। वह शासन के लिए अयोग्य हैं। पंजाब को एक स्थिर मानसिकता वाले नेता की जरूरत है। उन्हें केजरीवाल से ज्यादा विपश्यना करने की जरूरत है।"
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