'कांग्रेस ने किया नजरअंदाज'
फैसल पटेल लंबे समय से यह महसूस कर रहे थे कि कांग्रेस में उन्हें पर्याप्त सम्मान और अवसर नहीं मिल रहे हैं। उनके पिता अहमद पटेल, सोनिया गांधी के सबसे करीबी सलाहकारों में से एक थे और कांग्रेस की रणनीति बनाने में अहम भूमिका निभाते थे। लेकिन फैसल को पार्टी में वह स्थान नहीं मिला जिसकी उन्हें उम्मीद थी।
2024 से शुरू हुई कांग्रेस से दूरी
कांग्रेस और फैसल पटेल के बीच विवाद की शुरुआत लोकसभा चुनाव 2024 से मानी जाती है। अहमद पटेल की पूर्व संसदीय सीट भरूच कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी (AAP) को सीट बंटवारे के तहत दे दी थी। जब कांग्रेस ने INDIA गठबंधन के सहयोगी आप को भरूच और भावनगर सीट सौंपने का फैसला किया, तो फैसल पटेल ने खुलकर नाराजगी जताई थी।
उन्होंने कहा था कि भरूच सीट कांग्रेस आराम से जीत सकती थी, क्योंकि अपने पिता की मृत्यु के बाद उन्होंने इस क्षेत्र में काफी मेहनत की थी। उनका कहना था कि इस सीट से उनका भावनात्मक लगाव है, इसलिए वह इसे इतनी आसानी से नहीं छोड़ सकते।
फैसल पटेल ने कांग्रेस छोड़ने का फैसला कर लिया है, लेकिन उनका अगला कदम क्या होगा, इस पर अभी उन्होंने खुलकर कुछ नहीं कहा है। हालांकि, उन्होंने यह जरूर स्पष्ट किया कि वह मानवता की सेवा किसी न किसी रूप में जारी रखेंगे।
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