इंडिया गठबंधन की रैली में विपक्ष की एकजुटता
रामलीला मैदान में रविवार को 'वोट बचाओ, देश बचाओ' नामक रैली का आयोजन कर इंडिया गठबंधन ने एकजुटता का संदेश देने में सफलता प्राप्त की। इस दौरान, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सभी विपक्षी नेता एकजुट होकर सामने आए। विपक्षी नेताओं की इस एकजुटता ने स्पष्ट कर दिया कि मतदाता सूची में होने वाली कथित गड़बड़ियों के मुद्दे पर वे किसी भी हद तक जाने के लिए तत्पर हैं।
हालांकि, चुनावी मुकाबले के संदर्भ में गठबंधन के विभिन्न दलों में एकजुटता का अभाव दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश में कुछ ही महीनों बाद विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, जहां कांग्रेस और समाजवादी पार्टी, दोनों इंडिया गठबंधन का हिस्सा हैं, लेकिन सीटों के बंटवारे को लेकर दोनों दलों के बीच मोलभाव जारी है।
राज्यों में टकराव की चुनौतियाँ
कई राज्यों में राजनीतिक टकराव की स्थिति उत्पन्न हो रही है। उदाहरण स्वरूप, केरल में लेफ्ट और कांग्रेस आमने-सामने हैं, जबकि पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के अकेले चुनाव लड़ने के कारण तृणमूल कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ा। आम आदमी पार्टी (आप) फिलहाल इंडिया गठबंधन का हिस्सा नहीं है, लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव में आप के कारण कांग्रेस को गुजरात में हार का सामना करना पड़ा था। ऐसे टकरावों ने विपक्षी एकता को कमजोर किया है।
अब विपक्ष एक बार फिर से एकजुट होने के प्रयास कर रहा है, जिसमें कांग्रेस की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
चुनावी रणनीति पर ध्यान केंद्रित
चुनावी रणनीतिकारों का मानना है कि एसआईआर और अन्य मुद्दों पर एकजुटता के साथ-साथ इंडिया गठबंधन के नेतृत्व और साझा एजेंडे पर भी चर्चा की जानी चाहिए। इससे यह सुनिश्चित होगा कि भाजपा को एकजुट होकर घेरने के साथ-साथ मत विभाजन का लाभ उठाने से भी रोका जा सके।
राहुल गांधी ने शिव बारात का उदाहरण देते हुए कहा कि भगवान शिव की बारात में कोई भी शामिल हो सकता है, और इसमें हर कोई नाच सकता है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता किशोर कुमार झा ने इस बात पर जोर दिया कि इस लंबी लड़ाई को सफलतापूर्वक अंजाम तक पहुंचाने के लिए सभी की एकजुटता आवश्यक है।
रैली से गठबंधन के विस्तार के संकेत
'वोट बचाओ, देश बचाओ' रैली के माध्यम से इंडिया गठबंधन ने अपने कुनबे का विस्तार करने के संकेत दिए हैं। क्षेत्रीय दलों की राजनीतिक मजबूरियाँ भी इस रैली में उभरकर सामने आईं। तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने आम तौर पर लेफ्ट पार्टियों से दूरी बनाए रखने के बावजूद कॉकरोच जनता पार्टी, युवा और लेफ्ट पार्टियों के साथ एकजुटता दिखाई। उन्होंने कहा कि सभी को मिलकर यह लड़ाई लड़नी होगी।
ममता बनर्जी की सीजेपी और जेन-जी के साथ एकजुटता से ऐसा प्रतीत होता है कि सीजेपी भविष्य में आंदोलन का हिस्सा बन सकती है। एक दिन पहले सीजेपी के अभिजीत दीपके ने ममता बनर्जी से मुलाकात भी की थी।





