सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद माफी की पेशकश
शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा की गई टिप्पणियों के बाद अपने बयान के लिए माफी मांगने की पेशकश की है। राउत ने कहा कि यदि उनके किसी शब्द से किसी को ठेस पहुंची हो, तो वे सुप्रीम कोर्ट से 10 बार माफी मांगने के लिए तैयार हैं। लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र की रक्षा की जिम्मेदारी अदालत की है।
राउत ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि वह पिछले चार वर्षों से शिवसेना के चुनाव चिह्न के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं और हो सकता है कि उस गुस्से में उनके मुँह से कोई अनुचित शब्द निकल गया हो।
सुप्रीम कोर्ट ने मांगा था स्पष्टीकरण
यह बयान सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी के बाद आया, जिसमें न्यायालय ने राउत से मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत पर की गई टिप्पणियों का स्पष्टीकरण मांगा था। शुक्रवार को, सुप्रीम कोर्ट ने राउत और पत्रकार निखिल वागले को इस मामले में नोटिस जारी किया था।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने इन दोनों के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की मांग की थी।
न्यायपालिका पर रखी उम्मीदें
संजय राउत ने सुप्रीम कोर्ट को न्याय की अंतिम उम्मीद बताया। उनका कहना है कि वे न्याय की मांग के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाते रहेंगे और उनका इरादा कभी भी अदालत की अवमानना करने का नहीं था।
राउत के अनुसार, उनकी टिप्पणियां चुनाव में कथित अनियमितताओं और राजनीतिक दलों के बीच दलबदल को लेकर जनता में बढ़ते गुस्से को दर्शाती हैं।
मुख्य न्यायाधीश के साथ विवाद का संदर्भ
यह विवाद उस समय उभरा जब मुख्य न्यायाधीश ने राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में आए विपक्षी नेताओं के प्रतिनिधिमंडल से मिलने से मना कर दिया था। यह प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं के संबंध में ज्ञापन सौंपने आया था।
इसके बाद, संजय राउत ने सोशल मीडिया पर मुख्य न्यायाधीश की आलोचना की और न्यायाधीशों की राजनीतिक नेताओं के साथ बातचीत को लेकर भी टिप्पणी की। इस पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने कार्रवाई का निर्णय लिया।
राउत की याचिका पर विचार
गुरुवार को, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने संजय राउत की याचिका पर प्रारंभिक रूप से विचार करने की सहमति दी थी। हालांकि, यह उनकी टिप्पणियों के बारे में स्पष्टीकरण देने की शर्त पर था।
राउत ने कहा कि वे न्यायपालिका से कथित गलत कामों के खिलाफ कार्रवाई की आशा रखते हैं और सुप्रीम कोर्ट के प्रति उनका सम्मान बरकरार है।





