रामलीला मैदान की 'एंटी वोट चोरी रैली' और मीडिया का बदलता नैरेटिव
1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में इंडिया (INDIA) गठबंधन की ओर से 'एंटी वोट चोरी महारैली' का आयोजन किया गया। इस रैली में देश भर से लाखों की संख्या में लोग पहुंचे। शुरुआती रिपोर्ट्स में मुख्यधारा मीडिया के कई वरिष्ठ पत्रकारों और न्यूज चैनलों ने स्वीकार किया कि मैदान खचाखच भरा हुआ था और लोगों का भारी हुजूम उमड़ा था। हालांकि, शाम होते-होते मीडिया के एक वर्ग का रुख अचानक बदल गया और रैली को 'फ्लॉप शो' के रूप में पेश किया जाने लगा।
बीजेपी का 'एडिटेड वीडियो' और खाली कुर्सियों का नैरेटिव
रैली के दौरान ही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की ओर से एक वीडियो जारी किया गया। इस वीडियो में रामलीला मैदान की खाली कुर्सियां दिखाई जा रही थीं और बैकग्राउंड में राहुल गांधी के भाषण का ऑडियो चलाया गया। जांच करने पर पता चला कि विजुअल्स रैली शुरू होने से पहले (जब लोग आ रहे थे) के थे, जबकि ऑडियो राहुल गांधी के मुख्य भाषण का था।
दो अलग-अलग समय के वीडियो और ऑडियो को जोड़कर एक नया नैरेटिव तैयार किया गया। इसके बाद बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि रैली में 40 फीसदी कुर्सियां खाली थीं। वहीं, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और शाहनवाज हुसैन ने भी रैली को पूरी तरह विफल बताया।
₹10,000-12,000 करोड़ के व्यापारिक नुकसान के दावों की असलियत
रैली वाले दिन ही मीडिया चैनलों पर यह हेडलाइन चलने लगी कि इस आयोजन से दिल्ली के व्यापारियों को ₹10,000 से ₹12,000 करोड़ का नुकसान हुआ है। जब इस आंकड़े की पड़ताल की गई तो पाया गया कि यह दावा चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के चेयरमैन बृजेश गोयल की ओर से किया गया था, जो उन्होंने व्हाट्सएप ग्रुप्स के आधार पर निकाला था।
आर्थिक आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में पूरी दिल्ली का दैनिक औसतन जीडीपी योगदान लगभग ₹3,000 करोड़ और पूरे होलसेल मार्केट का दैनिक कारोबार ₹1,500 से ₹1,600 करोड़ है। ऐसे में मात्र 20-25 बाजारों के बंद होने से 12,000 करोड़ का नुकसान होना आर्थिक रूप से पूरी तरह से अवास्तविक और भ्रामक साबित होता है।
विपक्ष के सवाल और संवैधानिक मुद्दे
रैली के दौरान राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस और प्रशासन के इशारे पर कनॉट प्लेस और आसपास के बाजारों को जबरन बंद करवाया गया, जिससे स्थानीय दुकानदारों को नुकसान हुआ। उन्होंने लोगों से स्थानीय व्यापारियों से खरीदारी करने की अपील की थी।
पूरे घटनाक्रम में मुख्य मुद्दा यह है कि जब विपक्ष चुनाव आयोग और चुनावी पारदर्शिता जैसी लोकतांत्रिक संस्थाओं पर गंभीर सवाल उठाता है, तो मुख्यधारा मीडिया मूल मुद्दों और सवालों पर जवाब मांगने के बजाय रैली की भीड़, राजनीतिक बयानों और भ्रामक आंकड़ों पर बहस केंद्रित कर देता है।





