प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी
सेंट्रल दिल्ली में 'एसआईआर' के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे कई प्रदर्शनकारियों को पुलिस द्वारा हिरासत में लिया गया। ये प्रदर्शनकारी भारतीय चुनाव आयोग के मुख्यालय की ओर बढ़ रहे थे, जिसका उद्देश्य वोटर लिस्ट से मतदाताओं के नामों को हटाने के खिलाफ अपनी आवाज उठाना था। इस दौरान, उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी की।
प्रदर्शन का आयोजन 'पीपुल अगेंस्ट एसआईआर' की दिल्ली समन्वय समिति ने किया था, जिसमें छात्रों, युवाओं और किसानों समेत कई वर्गों के लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारी तिरंगा और अपने संगठन के बैनर लेकर मार्च में शामिल हुए। उन्होंने 'ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो', 'एसआईआर रोको' और 'वोट चोरी बर्दाश्त नहीं करेंगे' जैसे नारे लगाए।
समर्थन में शामिल हुए संगठन
मार्च में माकपा की वरिष्ठ नेता वृंदा करात, ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक वुमेंस एसोसिएशन (एआईडीडब्ल्यूए) और ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (एआईडीएसओ) के सदस्य भी शामिल हुए। यह मार्च कालीबाड़ी मार्ग और भाई वीर सिंह मार्ग के चौराहे पर स्थित गोल डाकखाना से प्रारंभ हुआ।
कई राज्यों से क्रांतिकारी युवा संगठन (केवाईएस) और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने भी इस प्रदर्शन को समर्थन दिया। मार्च में दिल्ली, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कार्यकर्ता भी शामिल थे। प्रदर्शन से पहले बंगला साहिब गुरुद्वारे के पास सुरक्षा बढ़ा दी गई थी और दिल्ली पुलिस तथा रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) के जवानों को तैनात किया गया था।
जन संसद का आयोजन
जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोका, तो वे सड़क पर बैठ गए और आयोजकों के निर्देशानुसार 'जन संसद' का आयोजन किया। एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि यह मामला जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में बहाल करने का नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र और देश को बचाने की लड़ाई है।
एक अन्य प्रदर्शनकारी ने विभिन्न संगठनों द्वारा देशभर में हो रहे प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की अधिसूचित सूची से हटा दिया गया, तो देश की हर सड़क जंतर-मंतर बन जाएगी।
प्रदर्शनों की जानकारी और आगामी कार्यक्रम
'पीपुल अगेंस्ट एसआईआर' ने विभिन्न शहरों में हो रहे प्रदर्शनों की जानकारी साझा करने के लिए एक वेबसाइट भी शुरू की है। इस समूह के अनुसार, 18 राज्यों के 88 शहरों में 145 संगठनों की भागीदारी से प्रदर्शन की योजना बनाई गई है। समूह ने शुक्रवार को होने वाले प्रदर्शनों की सूची जारी की है और एसआईआर के खिलाफ अपने अभियान के तहत एक नवंबर तक के कार्यक्रमों की भी घोषणा की है।
आयोजकों ने किसानों, मजदूरों, युवाओं, महिलाओं और समाज के विभिन्न वर्गों से राष्ट्रीय ध्वज लेकर मार्च में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि मार्च शांतिपूर्ण और अनुशासित रहेगा। पुलिस जहां भी मार्च को रोकेगी, वहां प्रतिभागी 'जन संसद' आयोजित करेंगे और इसके बाद प्रस्ताव पारित किए जाएंगे एवं राष्ट्रगान गाया जाएगा।





