जामिया का वर्तमान विवाद
बीस तंबुओं, स्वतंत्रता संग्राम और महात्मा गांधी की प्रेरणा... जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय की नींव आज से 106 साल पहले इन्हीं तत्वों से रखी गई थी। हाल ही में, दिल्ली स्थित जामिया परिसर की दीवारों पर 'फ्री कश्मीर' और 'फ्री फिलिस्तीन' जैसे नारे लिखे जाने के कारण विश्वविद्यालय फिर से सुर्खियों में है। यह सब छात्र संघ की बहाली की मांग के बीच हुआ, जब प्रशासन और छात्रों के बीच वार्ता विफल रही।
इस घटना के साथ ही गालिब की ऐतिहासिक प्रतिमा पर भी आपत्तिजनक लिखावट की गई, जिसे विश्वविद्यालय ने बेहद दुखद बताया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, दीवारों पर जेल में बंद शरजील इमाम को रिहा करने की मांग भी लिखी मिली है। आरएसएस और एबीवीपी के खिलाफ भी आपत्तिजनक बातें लिखी गई हैं, जिसके बाद एबीवीपी ने इसे देश विरोधी करार दिया और कार्रवाई की मांग की है। सोशल मीडिया पर इन तस्वीरों के वायरल होते ही माहौल गर्म हो गया।
जामिया का ऐतिहासिक धरोहर
इस विवाद के बीच जामिया के गठन के इतिहास पर नजर डालते हैं। 'जामिया' का अर्थ विश्वविद्यालय और 'मिल्लिया' का अर्थ राष्ट्रीय है, जो इसके निर्माण के उद्देश्य को स्पष्ट करता है। अगस्त 1920 में महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन का आह्वान किया, जिसमें लोगों से सरकारी संस्थानों का बहिष्कार करने की अपील की गई। इस पुकार पर मौलाना महमूद हसन, मोहम्मद अली जौहर और अन्य प्रमुख नेताओं ने आगे बढ़कर जामिया की स्थापना की।
29 अक्टूबर 1920 को मौलाना महमूद हसन ने अलीगढ़ में जामिया की नींव रखी। हकीम अजमल खां पहले चांसलर बने जबकि मोहम्मद अली वाइस चांसलर नियुक्त किए गए। इस विश्वविद्यालय का प्रारंभ अलीगढ़ के एमएओ कॉलेज के पास बीस तंबुओं से हुआ।
वित्तीय चुनौतियाँ और गांधी का समर्थन
जामिया की स्थापना के समय सरकारी सहायता नहीं थी, इसलिए इसकी वित्तीय स्थिति कमजोर थी। महात्मा गांधी ने चंदा जुटाने के लिए प्रमुख उद्योगपतियों को पत्र लिखे, जिसमें जमनालाल बजाज और घनश्यामदास बिड़ला शामिल थे। जब विश्वविद्यालय पर ताला लगने की स्थिति बनी, तो गांधी ने भीख मांगने तक की बात कही। हकीम अजमल खां ने भी अपनी निजी संपत्ति से विश्वविद्यालय का खर्च उठाया।
1925 में जामिया अलीगढ़ से दिल्ली के करोल बाग स्थानांतरित हो गई, और 1936 में अधिकांश संस्थान नए परिसर में चले गए जो ओखला में स्थापित हुआ। स्वतंत्रता के बाद, 1988 में संसद के कानून द्वारा जामिया को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिला।
106वें स्थापना दिवस की तैयारी
जामिया मिल्लिया इस्लामिया 29 अक्टूबर को अपने 106वें स्थापना दिवस की तैयारी कर रही है। इस दिन को विशेष मानते हुए विश्वविद्यालय हर साल तालीमी मेले का आयोजन करता है। हालांकि, हाल के घटनाक्रम के कारण, छात्र संघ की बहाली के चलते विश्वविद्यालय प्रशासन ने 29 अक्टूबर से 1 नवंबर 2026 तक होने वाले तालीमी मेले को रद्द करने का निर्णय लिया है।
इस प्रकार, जामिया मिल्लिया इस्लामिया का इतिहास और वर्तमान दोनों ही महत्वपूर्ण विषय हैं, जो शिक्षा, राजनीति और सामाजिक मुद्दों के बीच एक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।





