मणिपुर में चुनावी माहौल
मणिपुर में विभिन्न समुदायों के बीच बढ़ती हिंसा के बीच विधानसभा चुनावों की घोषणा जल्द ही होने की संभावना है। इंडिया गठबंधन के तहत विपक्षी दल एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतरने की योजना बना रहे हैं। कांग्रेस पार्टी सभी सहयोगी दलों को साथ लेकर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है, जिसमें लेफ्ट पार्टियां, तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव ठाकरे) और एनसीपी (शरद पवार) शामिल हो सकते हैं।
कानून व्यवस्था का मुद्दा
प्रदेश कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि मणिपुर में कानून व्यवस्था एक प्रमुख चिंता का विषय है। भाजपा की नेतृत्व वाली राज्य और केंद्र सरकार शांति स्थापित करने में असफल रही है। ऐसे में कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को चुनावी अभियान में प्रमुखता देने की योजना बना रही है।
राहुल गांधी की चुनावी रणनीति
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी इस महीने के अंत या दिसंबर की शुरुआत में एक बड़ी रैली आयोजित करने की योजना बना रहे हैं, जिससे चुनाव प्रचार की शुरुआत की जाएगी। पार्टी को उम्मीद है कि मणिपुर में उनका प्रदर्शन पिछले चुनावों की तुलना में बेहतर होगा, जहां कांग्रेस ने केवल पांच सीटें जीती थीं।
पिछले चुनावों का विश्लेषण
मणिपुर विधानसभा में कुल 60 सीटें हैं, लेकिन पिछले दो चुनावों में कांग्रेस, लेफ्ट पार्टियां, तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना और एनसीपी अलग-अलग चुनाव लडती रहीं। भाजपा ने 2022 के चुनाव में 32 सीटों के साथ 38 प्रतिशत वोट प्राप्त किए थे, जबकि कांग्रेस केवल 17 प्रतिशत वोट के साथ पांच सीटें जीतने में सफल रही।
कांग्रेस को उम्मीद है कि लोकसभा चुनाव में मिली सफलता, जहां पार्टी ने मणिपुर की दोनों सीटें जीतीं और वोट प्रतिशत 47 प्रतिशत तक पहुंचा, आगामी विधानसभा चुनावों में भी दोहराई जाएगी।





