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केरल हाई कोर्ट ने कहा, धरना-प्रदर्शन का लोकतंत्र में कोई स्थान नहीं

कोर्ट ने छात्रों को राजनीतिक गतिविधियों के लिए संस्थान से बाहर करने की चेतावनी दी।

केरल हाई कोर्ट ने कहा, धरना-प्रदर्शन का लोकतंत्र में कोई स्थान नहीं
फोटो: Kerala High Court Rules No Place for Protests in Democracy

कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय

केरल हाई कोर्ट ने मंगलवार को श्री शंकराचार्य संस्कृत यूनिवर्सिटी के 16 सस्पेंडेड छात्रों को 4 नवंबर से शुरू होने वाली सेमेस्टर परीक्षा में भाग लेने की अनुमति देने वाले एकल न्यायाधीश के अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि धरना, भूख हड़ताल और सत्याग्रह जैसी राजनीतिक गतिविधियों का संवैधानिक लोकतंत्र में कोई स्थान नहीं है।


कोर्ट ने यह भी बताया कि यदि कोई छात्र शैक्षणिक संस्थानों में ऐसी गतिविधियों में शामिल होता है, तो उसे निकाला जा सकता है। इस संदर्भ में, न्यायालय ने 2017 में दिए गए एक फैसले का उल्लेख किया।


यूनिवर्सिटी की अपील को मिली मंजूरी

यूनिवर्सिटी ने एकल न्यायाधीश के 30 अक्टूबर के अंतरिम आदेश के खिलाफ अपील दायर की थी, जिसमें विश्वविद्यालय को परीक्षा शुल्क स्वीकार करने और सस्पेंडेड छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई थी। डिवीजन बेंच ने इस अपील को स्वीकार करते हुए पूर्व के आदेश को रद्द कर दिया।


कोर्ट ने स्पष्ट किया कि PhD स्कॉलर्स के अलावा अन्य याचिकाकर्ताओं का परीक्षा में बैठने का अधिकार है या नहीं, इस पर रिट याचिका में कोई ठोस दलील पेश नहीं की गई है। इसलिए, यह दलीलें प्रारंभिक दृष्टि में मजबूत नहीं मानी गईं।


विवाद का संदर्भ

यह विवाद 13 अगस्त को यूनिवर्सिटी परिसर में हुई घटना से शुरू हुआ था, जब एसएफआई से जुड़े 16 छात्रों ने वाइस चांसलर का नकली अंतिम संस्कार किया। इस घटना के बाद, वाइस चांसलर पर हमले की कोशिश की गई और उनकी गाड़ी को नुकसान पहुँचाने का प्रयास किया गया।


छात्रों का कहना है कि वे केवल उन लाइट्स का नकली अंतिम संस्कार कर रहे थे जो काम नहीं कर रही थीं, और यह कोई व्यक्तिगत हमला नहीं था। घटना के बाद पुलिस में एफआईआर दर्ज की गई और सभी 16 छात्रों को 1 सितंबर को अनुशासनात्मक जांच पूरी होने तक सस्पेंड कर दिया गया।


छात्रों की याचिका और अंतरिम राहत

सस्पेंशन और अनुशासनात्मक कार्रवाई में देरी के कारण नाराज छात्रों ने हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की। इस याचिका के साथ, छात्रों ने 4 नवंबर से शुरू होने वाली परीक्षा में शामिल होने की अनुमति के लिए एक अंतरिम आवेदन भी प्रस्तुत किया।


एकल न्यायाधीश ने छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति देने वाले आवेदन को मंजूर किया, लेकिन विश्वविद्यालय ने इस आदेश को चुनौती देते हुए डिवीजन बेंच में अपील की, जिसे अब स्वीकार कर लिया गया है। इस निर्णय के बाद, सस्पेंडेड छात्रों को वर्तमान सेमेस्टर परीक्षा में भाग लेने की अनुमति नहीं मिलेगी।