हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी
केरल हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि संवैधानिक लोकतंत्र में धरना, भूख हड़ताल और सत्याग्रह जैसी राजनीतिक गतिविधियों के लिए कोई स्थान नहीं है। अदालत की यह टिप्पणी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरभ दास द्वारा साझा की गई एक पोस्ट पर आई है, जिसमें उन्होंने अदालत के फैसले को लेकर तंज कसा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'वाह! वाह! वाह! संवैधानिक अदालतों ने हमें बहुत गौरवान्वित किया है! जोरदार तालियां!'
सौरभ दास का यह पोस्ट अदालत की टिप्पणी पर व्यंग्यात्मक रूप से प्रतिक्रिया माना जा रहा है।
निलंबित छात्रों का मामला
यह मामला केरल के कालडी स्थित श्री शंकराचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय के 16 निलंबित छात्रों से संबंधित है। 13 अगस्त 2026 को, छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर में एक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया, जिसका दावा किया गया कि इस दौरान कुलपति के साथ धक्का-मुक्की की गई और उनकी गाड़ी को नुकसान पहुँचाने का प्रयास किया गया।
छात्रों का तर्क था कि उनका प्रदर्शन विश्वविद्यालय में खराब पड़ी स्टेज लाइटों और अन्य सुविधाओं की कमी के खिलाफ था। उन्होंने कुलपति के प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार के आरोपों को भी नकारा। इस घटना के परिणामस्वरूप, विश्वविद्यालय प्रशासन ने 1 सितंबर को 16 छात्रों को निलंबित कर दिया।
हाईकोर्ट के आदेश का पलटा जाना
निलंबित छात्रों ने सेमेस्टर परीक्षा में शामिल होने की अनुमति के लिए हाईकोर्ट का रुख किया। 30 अक्टूबर को, एकल न्यायाधीश ने उन्हें अंतरिम राहत देते हुए परीक्षा में बैठने की अनुमति दी। लेकिन विश्वविद्यालय ने इस आदेश को खंडपीठ में चुनौती दी, यह कहते हुए कि छात्रों ने परीक्षा में भाग लेने के लिए आवश्यक शर्तें पूरी नहीं की थीं।
3 नवंबर को, जस्टिस अनिल के. नरेंद्रन और जस्टिस मुरली कृष्ण एस. की खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश का आदेश रद्द कर दिया और 16 छात्रों को परीक्षा देने की मिली अंतरिम अनुमति को समाप्त कर दिया। अदालत ने 2017 के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि शिक्षण संस्थानों में ऐसी गतिविधियों में शामिल छात्रों को निष्कासित किया जा सकता है।





