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मीडिया की भूमिका पर सवाल: सत्ता, विपक्ष और लोकतंत्र के बीच पत्रकारिता की कसौटी

मीडिया की निष्पक्षता, सरकार से सवाल, विपक्ष के विरोध और डिजिटल पत्रकारिता की चुनौतियों पर डॉ. पंकज श्रीवास्तव ने रखे विचार।

मीडिया की भूमिका पर सवाल: सत्ता, विपक्ष और लोकतंत्र के बीच पत्रकारिता की कसौटी
फोटो: मीडिया की स्वतंत्रता, गोदी मीडिया, डॉ. पंकज श्रीवास्तव, राहुल गांधी, लोकतंत्र और पत्रकारिता

सरकार से सवाल पूछना ही मीडिया की जिम्मेदारी

‘द थर्ड आई’ के एक विशेष एपिसोड में पत्रकारिता, लोकतंत्र और सत्ता के संबंधों पर चर्चा हुई। बातचीत में वरिष्ठ पत्रकार डॉ. पंकज श्रीवास्तव ने कहा कि मीडिया का मूल काम सरकार की तारीफ करना नहीं, बल्कि जनता के सवालों को सामने लाना और सत्ता से जवाब मांगना है। उनके मुताबिक, जब पत्रकारिता का बड़ा हिस्सा सरकार के पक्ष में खड़ा दिखाई देता है, तब महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा और आम लोगों से जुड़े मुद्दे पीछे छूट जाते हैं।

कार्यक्रम में राहुल गांधी को लेकर टीवी बहसों और विपक्ष के आंदोलनों को ‘अराजकता’ बताने की प्रवृत्ति पर भी सवाल उठाए गए। श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार की आलोचना करना देशविरोध नहीं है। लोकतंत्र में असहमति और शांतिपूर्ण विरोध नागरिकों का अधिकार है।

 

मीडिया पर कॉरपोरेट और राजनीतिक दबाव का आरोप

चर्चा के दौरान मीडिया संस्थानों के मालिकाना ढांचे, सरकारी विज्ञापनों और राजनीतिक प्रभाव का मुद्दा उठा। श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि कॉरपोरेट हितों और सत्ता के दबाव के कारण कई समाचार संस्थानों की संपादकीय स्वतंत्रता प्रभावित होती है। उन्होंने एनडीटीवी के स्वामित्व में बदलाव और किसानों के आंदोलन की कवरेज का उदाहरण देते हुए कहा कि विरोध करने वालों को देशद्रोही बताने के बजाय उनकी मांगों पर चर्चा होनी चाहिए।

उन्होंने ‘मैन्युफैक्चरिंग कंसेंट’ की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि लगातार एक ही तरह की खबरें और विचार दिखाने से जनमत प्रभावित हो सकता है। हालांकि, कार्यक्रम में लगाए गए आरोपों को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।

 

वैकल्पिक मीडिया और पत्रकारिता की चुनौतियां

इंटरव्यू में यूट्यूब और डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव पर भी बात हुई। वक्ताओं ने माना कि वैकल्पिक मीडिया ने उन मुद्दों को जगह दी है जिन्हें मुख्यधारा के चैनलों पर पर्याप्त महत्व नहीं मिलता। लेकिन एल्गोरिदम, वायरल होने की होड़, सीमित संसाधन और गलत सूचनाओं का खतरा इसकी बड़ी चुनौतियां हैं।

श्रीवास्तव के अनुसार, अच्छी पत्रकारिता के लिए जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की जांच, संपादकीय समीक्षा और खबर का पूरा संदर्भ देना जरूरी है। केवल विवादास्पद बयान या वायरल वीडियो पत्रकारिता का विकल्प नहीं हो सकते।

 

शिक्षा, विरोध और अभिव्यक्ति की आजादी

उत्तर प्रदेश में टीजीटी-पीजीटी अभ्यर्थियों के आंदोलन, प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई, बुलडोजर कार्रवाई और पुलिस मुठभेड़ों को लेकर भी चर्चा हुई। श्रीवास्तव ने इन मामलों में न्यायिक प्रक्रिया और नागरिक अधिकारों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण कानून और आरटीआई से जुड़े प्रावधानों पर चिंता जताते हुए कहा कि इनका असर खोजी पत्रकारिता पर पड़ सकता है।

बातचीत का निष्कर्ष था कि लोकतंत्र में मीडिया की विश्वसनीयता निष्पक्षता, सवाल पूछने की स्वतंत्रता और जवाबदेही से बनती है। सत्ता किसी भी दल की हो, पत्रकारिता का पक्ष जनता और संविधान के मूल्यों के साथ होना चाहिए।

इस पूरी खबर को वीडियो फॉर्मेट में देखिए के लिए, क्लिक करें नीचे दिए गए लिंक पर-  https://youtu.be/IJrCBnm6jDY?si=y4nvs1aXuqmB8g0g

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