सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का घटनाक्रम
गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच सुनवाई हुई। इस मामले में पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कोर्ट में उनकी बातों को बाधित करने का प्रयास किया गया और इस दौरान उनका माइक्रोफोन भी छीन लिया गया।
इस अप्रिय अनुभव के कारण, शंकरनारायणन ने दिल्ली में होने वाले सात मामलों से अपना नाम वापस ले लिया है। उन्होंने यह भी बताया कि सुनवाई के दौरान उन्हें अपनी बात रखने का पूरा अवसर नहीं मिला।
सुनवाई के दौरान हुई बाधाएं
शंकरनारायणन ने 'बार एंड बेंच' को बताया, “सुप्रीम कोर्ट की पीठ अदालत को नियंत्रित करने में विफल रही। मैं इस तरह काम जारी नहीं रख सकता। अदालत की गरिमा ज्यादा महत्वपूर्ण है।” उन्हें सात मामलों में अपना पक्ष रखने के लिए आमंत्रित किया गया था और वे पूरी तैयारी के साथ आए थे।
हालांकि, जब उन्होंने अपनी दलीलें पेश करने की कोशिश की, तो अन्य वकीलों ने उन्हें बार-बार रोका। इसके चलते वे अपनी बात को पूरी तरह नहीं रख सके। सुनवाई के अंत में, जब उन्होंने कुछ और बातें साझा करने की कोशिश की, तो एक वरिष्ठ महिला वकील ने कथित रूप से उनका माइक्रोफोन छीन लिया। इसके बाद शंकरनारायणन ने कोर्ट रूम छोड़ दिया।
न्यायालय की व्यवस्था पर चिंता
सुनवाई के दौरान शंकरनारायणन ने अदालत में व्यवस्था की कमी पर अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मामलों को उनके क्रम के अनुसार नहीं उठाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत की गरिमा और मर्यादा को बनाए रखना बेहद आवश्यक है, भले ही उन्हें अपनी उपस्थिति बनाए रखने से क्यों न समझौता करना पड़े।
गुरुवार को सुनवाई की अध्यक्षता भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत कर रहे थे, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची भी शामिल थे। इस पीठ ने लगभग 46 याचिकाओं पर सुनवाई की, जो पुलिस की कार्रवाई, गैर-कानूनी हिरासत, लोगों की आवाजाही पर पाबंदियों, पत्रकारों के अधिकारों और जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन की जगह के रूप में डीनोटिफाई किए जाने से संबंधित थीं।





