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मोहन यादव और शिवराज सिंह चौहान के बीच बढ़ती तकरार: क्या है मामला?

मध्य प्रदेश में आदिवासी परिवारों के घरों को तोड़े जाने पर भाजपा में विवाद बढ़ा।

मोहन यादव और शिवराज सिंह चौहान के बीच बढ़ती तकरार: क्या है मामला?
फोटो: Escalating Tension Between Mohan Yadav and Shivraj Singh Chouhan: What's the Matter?

भाजपा में बढ़ता विवाद

मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में आदिवासी परिवारों के घरों को ध्वस्त किए जाने से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में विवाद गहरा गया है। केंद्रीय कृषि मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस कार्रवाई को लेकर अपनी नाराजगी व्यक्त की है। शिवराज ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को फोन कर इस मामले का विरोध दर्ज कराया, जिससे पार्टी के भीतर राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है। उल्लेखनीय है कि शिवराज सिंह चौहान बुधनी विधानसभा क्षेत्र से प्रतिनिधित्व करते हैं।


शिवराज ने कोसमी में प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और इस मामले पर गंभीर आपत्ति जताई। जब वह वहां पहुंचे, तो वन विभाग और प्रशासन का कोई बड़ा अधिकारी वहाँ मौजूद नहीं था, जिससे उनकी नाराजगी और बढ़ गई। घटनास्थल से उन्होंने मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल को फोन कर जानकारी दी और भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को भी इस मुद्दे पर अवगत कराया।


शिवराज का कड़ा संदेश

शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट रूप से कहा कि गरीब परिवारों को बेघर करने वाले अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि जिन परिवारों के घरों को तोड़ा गया है, उनके लिए नए आवास बनाए जाएंगे। इसके साथ ही, जब तक उनकी स्थायी व्यवस्था नहीं होती, तब तक अस्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। शिवराज ने यह सवाल उठाया कि 'जिन परिवारों ने भाजपा को वोट दिया, उन्हें ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है?'


शिवराज के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान ने भी 13 अक्टूबर को कोसमी का दौरा किया और प्रभावित परिवारों के साथ समय बिताया। इस स्थिति के कारण मुख्यमंत्री मोहन यादव को भी आदिवासी परिवारों की मांगों का जवाब देना पड़ा।


मोहन यादव की मुश्किलें

राजनीतिक साजिशों के बीच, मोहन यादव को अपने ही दल के भीतर से विरोध का सामना करना पड़ रहा है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि अधिकारियों की कार्यवाही ने मुख्यमंत्री की छवि को नुकसान पहुँचाया है। उनसे की गई कार्रवाई की मांग ने मोहन यादव को असहज कर दिया है।


इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए मोहन यादव ने कहा है कि उन्होंने प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है और इस मामले की जांच का आदेश दिया है। शिवराज की आलोचना के संदर्भ में उन्होंने कहा, 'हमारे वरिष्ठ नेता ने एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है। हम इसकी गहन जांच कराएंगे और सभी तथ्यों को स्पष्ट करेंगे।'


शिवराज का मुख्यमंत्री से मिलना

गुरुवार की रात, शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री मोहन यादव से मिला, जिसमें कुछ आदिवासी भी शामिल थे। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि मामले की गंभीरता से जांच की जाएगी और सभी को न्याय मिलेगा। उन्होंने कहा कि आपसी बातचीत के माध्यम से इसका समाधान निकाला जाएगा।


इस घटनाक्रम ने भाजपा में अनबन की अटकलों को जन्म दिया है। कुछ विधायकों और समर्थकों के बीच असंतोष का पनपना इस बात का संकेत है कि शिवराज सिंह चौहान के समर्थक मौजूदा सरकार में हाशिए पर महसूस कर रहे हैं।


भाजपा में अंदरूनी मतभेद

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह विवाद कुछ समय से चल रहा था, लेकिन यह उस समय सामने आया जब मोहन यादव ने शिवराज सिंह चौहान के कुछ नीतिगत निर्णयों को पलटना शुरू किया। केंद्रीय मंत्री के समर्थकों के लिए यह स्थिति अस्वीकार्य हो गई है।


भाजपा के भीतर बढ़ते असंतोष और तकरार ने यह संकेत दिया है कि पार्टी में मतभेद गहरे हो रहे हैं, जो आगामी चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।